
U19 वर्ल्ड कप 2026 के हीरो वैभव सूर्यवंशी बोर्ड परीक्षा के लिए फिर डेस्क पर
भारत के युवा क्रिकेट स्टार वैभव सूर्यवंशी ने हाल ही में ICC अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 में अपनी विस्फोटक बल्लेबाज़ी से सबका मन मोह लिया और टीम इंडिया को छठा खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन अब यह युवा बल्लेबाज़ मैदान की चमक-दमक के बीच खुद की पढ़ाई की “अकादमिक पिच” पर लौटने वाला है, क्योंकि वह सीबीएसई कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुट गया है।
वैभव सूर्यवंशी ने ज़िम्मेदारी से दोनों दुनिया को संतुलित किया है — जहाँ एक तरफ़ उन्होंने वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 175 रन की ऐतिहासिक पारी खेलकर अंडर-19 क्रिकेट में एक यादगार प्रदर्शन दिया और विश्व रिकॉर्ड भी बनाया, वहीं अब वह 17 फरवरी से शुरू होने वाली 10वीं बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
समस्तीपुर (बिहार) के पोडर इंटरनेशनल स्कूल के प्रिंसिपल नील किशोर ने बताया कि वैभव ने बोर्ड परीक्षा के लिए अपना एडमिट कार्ड प्राप्त कर लिया है और वह अपनी पढ़ाई में पूरी ध्यान केंद्रित करेंगे। किशोर ने यह भी स्पष्ट किया कि सूर्यवंशी को कोई विशेष सुविधाएँ नहीं दी जाएंगी, बल्कि मैदान के बाहर वह सामान्य छात्र की तरह अपने सहपाठियों के साथ परीक्षा देंगे। इससे यह संदेश मिलता है कि युवा खिलाड़ी न केवल खेल में बल्कि शिक्षा में भी निष्पक्षता और गंभीरता से भाग ले रहे हैं।
वैभव की यह यात्रा खास है, क्योंकि वे सिर्फ 14 वर्ष के हैं और इतने कम उम्र में उन्होंने क्रिकेट के बड़े मंच पर दमदार प्रदर्शन किया। विश्व कप के दौरान उन्होंने 439 रन बनाए — जिसमें उनका 175 रन का रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन शामिल है — और अपने खेल से आलोचकों और दर्शकों दोनों को प्रभावित किया। उन्हें टूर्नामेंट का शीर्ष रन-स्कोरर भी कहा गया।
युवा खिलाड़ी होने के बावजूद वैभव ने यह भी दिखाया कि खेल और पढ़ाई दोनों को साथ-साथ सफलतापूर्वक संतुलित किया जा सकता है। चाहे वह मैदान पर छक्कों और चौकों की बरसात करना हो या कक्षा में पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान देना — वह हर चुनौती का सामना आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ कर रहे हैं। उनके सहपाठियों, शिक्षकों और परिवार ने भी इस निर्णय का पूरा समर्थन किया है और कहा है कि वे बोर्ड परीक्षाओं में भी उसी जोश और लगन से तैयारी करेंगे जैसा उन्होंने क्रिकेट में दिखाई।
विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे युवा खिलाड़ी जो खेल और शिक्षा दोनों में रूचि रखते हैं, वे अपने जीवन में बेहतर संतुलन बनाते हैं और दीर्घकालिक सफलता प्राप्त करते हैं। वैभव की यह नई चुनौती, जो उन्होंने क्रिकेट की चमक-दमक के बाद चुनी है, एक सकारात्मक उदाहरण है कि युवा प्रतिभाएँ अपने करियर के शुरुआती मुकाम पर भी शिक्षा को प्राथमिकता दे सकती हैं।



