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खामेनेई की मौत पर बाबा रामदेव का बड़ा बयान, बोले

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पश्चिम एशिया में जारी ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत को लेकर वैश्विक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में योग गुरु स्वामी रामदेव ने भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी है। एक टीवी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की हत्या की जा सकती है, लेकिन उसके विचारों को खत्म नहीं किया जा सकता।

रामदेव ने अपने बयान में खामेनेई के प्रभाव और उनके विचारों को लेकर कहा कि ऐसे व्यक्तित्व केवल व्यक्ति नहीं होते, बल्कि एक विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसे लाखों-करोड़ों लोग मानते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खामेनेई का परिवार इस्लामिक परंपरा में विशेष स्थान रखता है और उनके समर्थकों की आस्था इतनी मजबूत है कि उसे किसी भी सैन्य कार्रवाई से खत्म नहीं किया जा सकता।

कार्यक्रम के दौरान रामदेव ने अमेरिका और इजरायल की भूमिका पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू को कठघरे में खड़ा करते हुए उन्हें “मानवता के खिलाफ काम करने वाला” बताया। उनका कहना था कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई से केवल क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी और इसके परिणाम आने वाले कई दशकों तक देखने को मिलेंगे।

उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान को इस संघर्ष में पूरी तरह हराना संभव नहीं है, क्योंकि वहां की जनता और नेतृत्व के भीतर गहरा आत्मविश्वास और वैचारिक ताकत मौजूद है। रामदेव के मुताबिक, यह युद्ध केवल सैन्य टकराव नहीं बल्कि विचारधाराओं की लड़ाई बन चुका है, जिसमें किसी एक पक्ष की पूर्ण जीत मुश्किल है।

गौरतलब है कि खामेनेई की मौत अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद हुई बताई जा रही है, जिसने पूरे मध्य-पूर्व को अस्थिर कर दिया है। इस घटना के बाद न सिर्फ ईरान बल्कि दुनिया के कई देशों में विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

भारत में भी इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां सरकार ने संयम और कूटनीति की बात कही है, वहीं विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के बीच भी इस घटना को लेकर चर्चा और मतभेद देखने को मिल रहे हैं।

कुल मिलाकर, स्वामी रामदेव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरा विश्व इस संघर्ष के परिणामों को लेकर चिंतित है। उनके शब्द इस बात को रेखांकित करते हैं कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों का नहीं, बल्कि विचारों और विश्वासों का भी होता है, जिसका असर लंबे समय तक वैश्विक राजनीति और समाज पर पड़ता है।

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