
भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक Reliance Industries ने वित्त वर्ष 2025-26 में ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसने देश के कॉर्पोरेट इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। Mukesh Ambani के नेतृत्व वाली इस कंपनी ने पहली बार 10 अरब डॉलर (करीब ₹95,000 करोड़ से अधिक) का वार्षिक मुनाफा पार कर लिया है, जो अब तक किसी भी भारतीय कंपनी के लिए संभव नहीं हो पाया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज का कुल शुद्ध लाभ लगभग ₹95,610 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 18% ज्यादा है। यह उपलब्धि सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि भारतीय कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर भी मजबूत स्थिति में पहुंच चुकी हैं। खास बात यह है कि कंपनी का यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजार में ऊर्जा कीमतों और सप्लाई चेन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
रिलायंस की इस सफलता के पीछे उसके विविध बिजनेस मॉडल की बड़ी भूमिका रही है। कंपनी का पारंपरिक तेल-रसायन (O2C) कारोबार अभी भी मजबूत आधार देता है, लेकिन हाल के वर्षों में डिजिटल और रिटेल कारोबार तेजी से उभरे हैं। Reliance Jio और Reliance Retail जैसे उपभोक्ता आधारित बिजनेस अब कंपनी के मुनाफे का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं और कुल आय में 55% से ज्यादा योगदान दे रहे हैं।
हालांकि, साल के अंतिम तिमाही (Q4 FY26) में कंपनी को कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव के कारण कंपनी के ऑयल-टू-केमिकल्स बिजनेस पर दबाव देखा गया, जिससे तिमाही मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई। बावजूद इसके, कंपनी के टेलीकॉम और रिटेल सेक्टर ने स्थिर प्रदर्शन करते हुए कुल परिणामों को संतुलित बनाए रखा।
विशेषज्ञों का मानना है कि रिलायंस की यह उपलब्धि भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़ती ताकत का संकेत है। कंपनी लगातार नए क्षेत्रों जैसे ग्रीन एनर्जी, डिजिटल सेवाएं और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी में निवेश कर रही है, जिससे भविष्य में और बड़े माइलस्टोन हासिल किए जा सकते हैं।
कुल मिलाकर, रिलायंस इंडस्ट्रीज का 10 अरब डॉलर से ज्यादा वार्षिक मुनाफा पार करना न केवल कंपनी के लिए बल्कि पूरे भारत के कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए गर्व की बात है। यह उपलब्धि यह भी दर्शाती है कि भारतीय कंपनियां अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़ी हैं और आने वाले समय में और बड़े रिकॉर्ड बना सकती हैं।



