
डाबर पर USFDA की सख्त टिप्पणी, कच्चे माल के गोदाम में मिले पक्षियों की बीट
भारत की प्रमुख आयुर्वेदिक और उपभोक्ता उत्पाद कंपनी Dabur India एक नए विवाद में घिर गई है। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (USFDA) ने कंपनी के दादरा और नगर हवेली स्थित ओटीसी (Over-The-Counter) उत्पाद निर्माण संयंत्र के निरीक्षण के दौरान कई गंभीर खामियां चिन्हित की हैं। निरीक्षण रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कच्चे माल के गोदाम में एक जीवित पक्षी और उसकी बीट (Bird Droppings) पाई गई, जो पैकेजिंग सामग्री के काफी करीब मौजूद थी। इसके अलावा गोदाम की छतों पर काले रंग का अज्ञात पदार्थ भी देखा गया।
USFDA की Form-483 रिपोर्ट में केवल स्वच्छता संबंधी कमियां ही नहीं, बल्कि डेटा इंटीग्रिटी, गुणवत्ता नियंत्रण और उत्पादन रिकॉर्ड से जुड़ी गंभीर चिंताएं भी जताई गई हैं। एजेंसी ने आरोप लगाया कि कुछ विनिर्माण रिकॉर्ड में कथित हेरफेर किया गया और माइक्रोबायोलॉजिकल परीक्षणों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए। निरीक्षण के दौरान संभावित सूक्ष्मजीवीय (microbiological) संक्रमण के जोखिम भी सामने आए।
रिपोर्ट के अनुसार, निरीक्षकों ने कच्चे माल के गोदाम में पक्षी और उसकी बीट के अलावा ऐसे हालात भी देखे जो कीटों और अन्य प्रदूषण के प्रवेश का जोखिम बढ़ा सकते हैं। FDA दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि गोदाम के कुछ हिस्सों में स्वच्छता और रखरखाव के मानकों का पर्याप्त पालन नहीं किया गया था।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए डाबर ने कहा कि उसे USFDA की टिप्पणियां प्राप्त हुई हैं और कंपनी नियामक एजेंसी के साथ पूरी तरह सहयोग कर रही है। कंपनी के अनुसार, निरीक्षण में उठाए गए मुद्दे एक विशेष उत्पादन इकाई से संबंधित हैं और उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम (Corrective Actions) उठाए जा रहे हैं। डाबर ने यह भी कहा कि उत्पादों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Form-483 जारी होना अंतिम दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती, बल्कि यह निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों की सूची होती है। आमतौर पर कंपनियां इसके जवाब में विस्तृत सुधारात्मक योजना प्रस्तुत करती हैं। यदि USFDA कंपनी के जवाब से संतुष्ट नहीं होता, तभी आगे की नियामक कार्रवाई की संभावना बनती है।



