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पाकिस्तानी नागरिकों के लिए ‘वीजा ऑन अराइवल’ बंद

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी देश कतर ने एक अहम और सख्त फैसला लेते हुए पाकिस्तानी नागरिकों के लिए ‘वीजा ऑन अराइवल’ सुविधा को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इस कदम को पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि खाड़ी देशों में यात्रा और रोजगार के लिहाज से यह सुविधा बेहद महत्वपूर्ण थी। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अब पाकिस्तान के नागरिकों को कतर यात्रा से पहले ही वीजा लेना अनिवार्य होगा, अन्यथा उन्हें एयरपोर्ट पर प्रवेश से रोका जा सकता है।

दरअसल, यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कतर में मौजूद पाकिस्तानी दूतावास ने भी अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर स्पष्ट किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में ‘वीजा ऑन अराइवल’ सुविधा उपलब्ध नहीं है और सभी यात्रियों को पहले से वीजा लेकर ही यात्रा करनी चाहिए।

इस फैसले का सीधा असर उन पाकिस्तानी यात्रियों पर पड़ेगा, जो व्यापार, काम या छोटी अवधि के लिए खाड़ी देशों की यात्रा करते हैं और तुरंत वीजा मिलने की सुविधा पर निर्भर रहते थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल सुरक्षा कारणों से नहीं, बल्कि क्षेत्र में बदलते कूटनीतिक समीकरणों का भी संकेत है, जहां कई खाड़ी देश अपने प्रवेश नियमों को और सख्त कर रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि जहां पाकिस्तान के लिए यह सुविधा बंद कर दी गई है, वहीं भारत के नागरिकों के लिए ‘वीजा ऑन अराइवल’ की सुविधा अभी भी जारी है। भारतीय यात्रियों को कतर पहुंचने पर 30 दिनों का मुफ्त वीजा मिल रहा है, बशर्ते वे जरूरी शर्तें जैसे वैध पासपोर्ट, होटल बुकिंग और रिटर्न टिकट पूरी करते हों। इससे साफ संकेत मिलता है कि कतर और भारत के बीच मजबूत कूटनीतिक संबंध इस फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

इसके अलावा, कतर सरकार ने पहले से देश में मौजूद विदेशी नागरिकों के वीजा की अवधि बढ़ाने जैसे कदम भी उठाए हैं, ताकि मौजूदा हालात में लोगों को राहत मिल सके। हालांकि, पाकिस्तानी नागरिकों के लिए यह प्रतिबंध फिलहाल अस्थायी बताया गया है, लेकिन इसे कब तक हटाया जाएगा, इस पर अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

कुल मिलाकर, कतर का यह फैसला न केवल क्षेत्रीय तनाव का असर दिखाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में खाड़ी देशों की वीजा नीतियों में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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