
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुए संकट का सीधा असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। हालात इतने गंभीर हो गए कि पाकिस्तान के शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई और प्रमुख सूचकांक KSE-100 एक ही दिन में हजारों अंकों तक लुढ़क गया। इस गिरावट ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया और पूरे बाजार में घबराहट का माहौल बन गया।
दरअसल, इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठाने की घोषणा और होर्मुज क्षेत्र में संभावित नाकेबंदी है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद तनाव तेजी से बढ़ गया, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता फैल गई। इसका असर पाकिस्तान के शेयर बाजार पर भी पड़ा, जहां निवेशकों ने तेजी से बिकवाली शुरू कर दी।
जानकारों के अनुसार, जैसे ही अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य दबाव बढ़ाने की खबर आई, वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। तेल की कीमतों में करीब 8% तक की वृद्धि ने उन देशों की चिंता बढ़ा दी जो आयात पर निर्भर हैं, और पाकिस्तान उनमें प्रमुख है। तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और व्यापार पर पड़ता है, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हो गया।
पाकिस्तान और ईरान के बीच व्यापारिक संबंध भी इस संकट से प्रभावित हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक ईरान पर निर्भर है, ऐसे में अगर होर्मुज मार्ग बाधित होता है या व्यापार रुकता है, तो इसका सीधा असर देश की ऊर्जा सप्लाई और आर्थिक स्थिरता पर पड़ेगा। यही कारण है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली देखने को मिली और कई सेक्टर जैसे बैंकिंग, तेल-गैस, सीमेंट और ऑटोमोबाइल में गिरावट दर्ज की गई।
इससे पहले जब अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी संघर्षविराम की खबर आई थी, तब पाकिस्तान का शेयर बाजार तेजी से उछला था और रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। लेकिन अब जैसे ही हालात फिर बिगड़े, बाजार ने उसी तेजी से गिरावट दर्ज की, जिससे यह साफ हो गया कि पाकिस्तान का बाजार अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर कितना निर्भर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट सिर्फ एक दिन की प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह आने वाले बड़े आर्थिक संकट का संकेत भी हो सकती है। अगर होर्मुज में तनाव और बढ़ता है या अमेरिका-ईरान टकराव गहराता है, तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे पाकिस्तान जैसे देशों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ेगा।
फिलहाल, स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और निवेशकों की नजरें वैश्विक घटनाक्रम पर टिकी हैं। यह साफ है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब सिर्फ एक समुद्री मार्ग नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि यह तनाव कम होता है या फिर पाकिस्तान समेत कई देशों के लिए आर्थिक संकट और गहरा होता जाता है।


