
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील के बाद अब केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri के बयान ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। तेल मंत्री ने कहा है कि सरकार को यह देखना होगा कि सरकारी तेल कंपनियां आखिर कब तक घाटा सहन कर सकती हैं। इस बयान को संभावित पेट्रोल-डीजल मूल्य वृद्धि के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में वैश्विक संकट का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और ईंधन बाजार पर पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में लोगों से अपील की थी कि वे पेट्रोल और डीजल का उपयोग कम करें, सार्वजनिक परिवहन अपनाएं, कारपूलिंग करें और जहां संभव हो वर्क फ्रॉम होम का विकल्प चुनें। उन्होंने विदेशी यात्राओं और गैर-जरूरी खर्चों में कटौती की भी सलाह दी थी ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके। सरकार का कहना है कि यह कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाए जा रहे हैं और देश में किसी तरह का ईंधन संकट नहीं है।
इसी बीच तेल मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि सरकारी तेल कंपनियां लंबे समय से बाजार कीमत से कम दरों पर पेट्रोल और डीजल बेच रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार तेल कंपनियों को डीजल पर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल पर करीब 20 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान हो रहा है। अप्रैल 2022 से देश में ईंधन की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल लगातार महंगा हुआ है।
हालांकि सरकार ने अभी तक पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि चुनाव खत्म होने के बाद अब सरकार कीमतें बढ़ाने की तैयारी में है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि “ईंधन बचाओ” की अपील वास्तव में आने वाली महंगाई का संकेत हो सकती है।
वहीं दूसरी तरफ सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। हरदीप पुरी ने कहा कि भारत के पास लगभग 60 दिनों का कच्चे तेल और एलएनजी का भंडार है, जबकि एलपीजी का स्टॉक करीब 45 दिनों के लिए पर्याप्त है। उन्होंने यह भी साफ किया कि फिलहाल देश में लॉकडाउन जैसी कोई स्थिति नहीं बनने जा रही है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें और बढ़ती हैं तो सरकार के लिए मौजूदा दरों पर ईंधन बेचना मुश्किल हो सकता है। इससे आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। बढ़ती तेल कीमतों का असर महंगाई, परिवहन लागत और रोजमर्रा की चीजों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल आम जनता की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है। लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा बदलाव होगा या सरकार तेल कंपनियों को राहत देने के लिए कोई दूसरा रास्ता निकालेगी। पश्चिम एशिया का संकट जितना लंबा खिंचेगा, भारत पर उसका आर्थिक दबाव उतना ही बढ़ सकता है।



