
प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचाने और सरकारी मितव्ययता अपनाने की अपील का असर अब राज्यों में साफ दिखाई देने लगा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री Bhajanlal Sharma ने बड़ा फैसला लेते हुए अपने सरकारी काफिले में वाहनों की संख्या कम करने के निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि सुरक्षा के नाम पर अनावश्यक गाड़ियों को काफिले में शामिल न किया जाए और पेट्रोल-डीजल की बचत को प्राथमिकता दी जाए। इस फैसले को केंद्र सरकार की उस मुहिम से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें देशभर में ईंधन संरक्षण और सरकारी खर्चों में कटौती पर जोर दिया जा रहा है।
राजस्थान सरकार की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी अपने काफिलों को सीमित रखना होगा। मुख्य सचिव V. Srinivas सहित वरिष्ठ अधिकारियों को भी वाहन उपयोग में संयम बरतने को कहा गया है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि सरकारी संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग भी सुनिश्चित हो सकेगा।
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने, कार पूलिंग अपनाने और अनावश्यक यात्राओं से बचने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि वैश्विक परिस्थितियों और बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच भारत को आत्मनिर्भर और जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की जरूरत है। पीएम मोदी की अपील के बाद बीजेपी शासित कई राज्यों ने तेजी से कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने सरकारी वाहनों के बेड़े में 50 प्रतिशत तक कटौती के निर्देश दिए हैं, जबकि महाराष्ट्र सरकार ने मंत्रियों के हवाई यात्रा उपयोग पर नियंत्रण की बात कही है। राजस्थान में भी अब सरकारी मितव्ययता को प्रशासनिक स्तर पर लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र सरकार इस अभियान को “राष्ट्रीय जिम्मेदारी” के रूप में पेश कर रही है।
राजस्थान सरकार ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से यह भी कहा है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और जहां संभव हो, ऑनलाइन बैठकों को प्राथमिकता दें। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की भी चर्चा चल रही है। राज्य सरकार का कहना है कि यदि छोटे-छोटे स्तर पर भी ईंधन की बचत की जाए तो उसका बड़ा असर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
हालांकि विपक्ष ने इस पूरे अभियान को लेकर सवाल भी उठाने शुरू कर दिए हैं। कुछ विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार जनता पर बचत का दबाव डाल रही है, जबकि बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों और रोड शो में भारी खर्च जारी है। विपक्ष ने यह भी मांग की है कि सरकार पहले वीआईपी संस्कृति और बड़े-बड़े काफिलों पर पूरी तरह रोक लगाए।
इसी बीच खबरें यह भी सामने आई हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने खुद अपने काफिले के आकार को कम करने के निर्देश दिए हैं, ताकि सरकार “उदाहरण पेश करके नेतृत्व” का संदेश दे सके। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में केंद्र और राज्य सरकारें ऊर्जा संरक्षण और सरकारी खर्चों में कटौती को लेकर और भी सख्त कदम उठा सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत पहले से तैयारी करना चाहता है। ऐसे में राजस्थान सरकार का यह फैसला सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि एक बड़े राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि आम जनता और अन्य राज्य सरकारें इस मुहिम को किस तरह अपनाती हैं।



