
Rajasthan Nikay Chunav Result: गहलोत के वार्ड में कांग्रेस हारी
राजस्थान के निकाय चुनाव 2026 के नतीजों ने प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। 309 शहरी स्थानीय निकायों के लिए हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर बढ़त बनाई, लेकिन कई दिग्गज नेताओं के प्रभाव वाले इलाकों में नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के वार्ड में कांग्रेस की हार और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के वार्ड में बीजेपी प्रत्याशी की हार को लेकर हो रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजस्थान की राजनीति में लंबे समय से मजबूत जनाधार वाले नेताओं में गिने जाते हैं। ऐसे में उनके वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशी की हार को पार्टी के लिए स्थानीय स्तर पर झटके के तौर पर देखा जा रहा है। यह नतीजा खास तौर पर इसलिए चर्चा में है क्योंकि निकाय चुनावों में स्थानीय समीकरण, उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और संगठन की सक्रियता भी परिणाम पर बड़ा असर डालती है।
दूसरी तरफ जोधपुर में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रभाव वाले वार्ड में बीजेपी प्रत्याशी की हार ने पार्टी के लिए भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि पूरे जोधपुर नगर निगम का मुकाबला बेहद करीबी रहा। उपलब्ध नतीजों के मुताबिक बीजेपी और कांग्रेस ने 44-44 वार्ड जीते, जबकि कई सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार निर्णायक भूमिका में रहे। एक वार्ड में EVM संबंधी तकनीकी समस्या के कारण पुनर्मतदान भी होना है।
राज्य के व्यापक नतीजों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। 10 नगर निगमों में बीजेपी ने जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा और कोटा में स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस को बीकानेर नगर निगम में बढ़त मिली। अजमेर और पाली में कांग्रेस आगे रही, जबकि अलवर में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी। कई निकायों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जिससे निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
इन चुनावों की सबसे खास बात यह रही कि निर्दलीय उम्मीदवारों ने कई जगहों पर दोनों प्रमुख दलों का गणित बिगाड़ दिया। भरतपुर नगर निगम में निर्दलीय उम्मीदवारों ने बहुमत हासिल किया, जबकि जोधपुर जैसे बड़े शहर में भी निर्दलीय पार्षद सत्ता गठन में निर्णायक हो सकते हैं। यही वजह है कि चुनाव परिणाम आने के बाद अब राजनीतिक दलों की नजर बोर्ड गठन और संभावित समर्थन जुटाने पर है।
जयपुर में भी बीजेपी ने मजबूत प्रदर्शन किया। रिपोर्ट के मुताबिक 150 सदस्यीय जयपुर नगर निगम में बीजेपी ने 78 और कांग्रेस ने 53 सीटें जीतीं। ऐसे में राजधानी में बीजेपी का प्रदर्शन पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस के लिए अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में मिली हार संगठन और स्थानीय रणनीति पर मंथन का कारण बन सकती है।
कांग्रेस ने चुनावी नतीजों पर परिसीमन को लेकर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने दावा किया कि परिसीमन की वजह से पार्टी को नुकसान हुआ। उनके मुताबिक करीब 10,100 वार्डों के आंकड़ों में दोनों प्रमुख दलों के वोट शेयर का अंतर एक प्रतिशत से भी कम था, लेकिन बीजेपी को करीब 500 ज्यादा वार्डों में जीत मिली। हालांकि यह कांग्रेस का राजनीतिक दावा है और इसे पार्टी के दृष्टिकोण के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
कुल मिलाकर राजस्थान के निकाय चुनावों ने बीजेपी को बढ़त जरूर दी है, लेकिन परिणाम पूरी तरह एकतरफा नहीं रहे। कई जगह कांग्रेस मुकाबले में बनी हुई है और निर्दलीयों ने सत्ता का समीकरण बदल दिया है। वहीं गहलोत और शेखावत जैसे बड़े नेताओं के प्रभाव वाले वार्डों में आए उलटफेर ने यह संकेत दिया है कि स्थानीय चुनावों में बड़े नेताओं की राजनीतिक पकड़ के साथ-साथ उम्मीदवार और स्थानीय मुद्दे भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।



