
इजरायल और हमास के बीच जारी संघर्ष के बीच 7 अक्टूबर 2023 के हमले से पहले की घटनाओं को लेकर नया खुलासा सामने आया है। इजरायल के पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट ने दावा किया है कि हमास की ओर से इजरायली सुरक्षा तंत्र तक हमले से कुछ सप्ताह पहले एक संदेश पहुंचा था। गैलेंट के मुताबिक, इस संदेश में तत्कालीन हमास नेता याह्या सिनवार की ओर से कहा गया था कि वह “जेलों को हिला देंगे।” हालांकि, उस समय इजरायली खुफिया एजेंसियों ने इस संदेश को संभावित बड़े हमले की चेतावनी के तौर पर नहीं समझा।
गैलेंट ने इजरायली आर्मी रेडियो से बातचीत में बताया कि यह संदेश शिन बेट यानी इजरायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी से जुड़े एक चैनल के जरिए पहुंचा था। उनके अनुसार, शिन बेट और सैन्य खुफिया निदेशालय ने उस समय इसका संबंध इराक में इजरायली शोधकर्ता एलिजाबेथ तुर्कोव के अपहरण से जुड़ी संभावित गतिविधियों से माना था। तुर्कोव को बाद में सितंबर 2025 में रिहा किया गया था।
रिपोर्टों के मुताबिक, यह संदेश सितंबर 2023 में इजरायली सुरक्षा अधिकारियों तक पहुंचा था। पूर्व फिलिस्तीनी प्राधिकरण के अधिकारी सुफियान अबू जैदा ने भी दावा किया है कि उन्होंने सिनवार का संदेश इजरायली सुरक्षा अधिकारियों तक पहुंचाया था। उनके मुताबिक, संदेश को लेकर उनसे पूछताछ भी की गई थी। हालांकि, उस समय इसकी व्याख्या हमास के किसी बड़े सैन्य अभियान की तैयारी के रूप में नहीं की गई।
गैलेंट के ताजा बयान के मुताबिक, खुफिया तंत्र ने संदेश को गलत संदर्भ में समझा और इसे संभावित कैदी अदला-बदली या तुर्कोव से जुड़े मामले से जोड़कर देखा। इस वजह से संदेश को 7 अक्टूबर जैसे बड़े हमले की सीधी चेतावनी नहीं माना गया। गैलेंट के बयान से यह सवाल फिर उठा है कि हमले से पहले उपलब्ध खुफिया सूचनाओं का आकलन किस तरह किया गया था।
गैलेंट ने यह भी कहा कि उन्हें उस समय इस संदेश की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी और बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से इस मामले को स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने यह भी दावा किया कि युद्ध के दौरान अमेरिका के साथ नेतन्याहू की कुछ महत्वपूर्ण बातचीत की जानकारी उन्हें कई बार अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क होने के बाद मिली। यह गैलेंट का व्यक्तिगत बयान है और इन आरोपों को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे सामने आए हैं।
इस बीच 7 अक्टूबर हमले से पहले मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात की ओर से कथित चेतावनियों को लेकर भी रिपोर्टें सामने आई हैं। गैलेंट ने कहा कि रक्षा मंत्री रहते हुए उन्हें ऐसी किसी चेतावनी की जानकारी नहीं दी गई थी और उन्होंने इन खबरों के बारे में पहली बार मीडिया रिपोर्टों के जरिए सुना। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी चेतावनियां वास्तव में दी गई थीं, तो उन्हें सुरक्षा तंत्र तक पहुंचाना महत्वपूर्ण था।
मिस्र और यूएई से जुड़ी इन कथित चेतावनियों को लेकर इजरायल सरकार की ओर से अलग रुख सामने आया है। नेतन्याहू के कार्यालय ने विदेशी चेतावनियों से जुड़े कुछ मीडिया दावों को खारिज किया है। विशेष रूप से यूएई के राष्ट्रपति की ओर से कथित चेतावनी वाली रिपोर्ट को कार्यालय ने गलत बताया है। मिस्र की चेतावनी से जुड़ी रिपोर्टों को लेकर भी इजरायली पक्ष ने पहले ऐसे दावों से इनकार किया था।
योआव गैलेंट नवंबर 2024 तक इजरायल के रक्षा मंत्री रहे थे और 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद शुरू हुए युद्ध के शुरुआती दौर में वह रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। बाद में नेतन्याहू ने उन्हें पद से हटा दिया था। दोनों नेताओं के बीच युद्ध की रणनीति और बंधकों से जुड़े मुद्दों को लेकर मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आते रहे हैं।
7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में इजरायल में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी और कई लोगों को बंधक बनाया गया था। इसके बाद इजरायल ने गाजा में व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया। अब हमले से पहले मिले कथित संदेशों और चेतावनियों को लेकर नए खुलासे ऐसे समय सामने आए हैं जब इजरायल में आगामी चुनाव को देखते हुए 7 अक्टूबर की घटनाओं और सरकार की जवाबदेही पर राजनीतिक बहस भी जारी है।
फिलहाल गैलेंट का बयान इस बात की पुष्टि करता है कि इजरायली सुरक्षा तंत्र तक हमास से जुड़ा एक संदेश पहुंचा था, लेकिन उस संदेश की तत्कालीन व्याख्या और उसका महत्व विवाद का विषय बना हुआ है। उपलब्ध रिपोर्टों में यह भी स्पष्ट है कि अलग-अलग कथित विदेशी चेतावनियों को लेकर इजरायल सरकार और अन्य स्रोतों के दावों में अंतर है। ऐसे में इन घटनाओं की पूरी तस्वीर आगे की जांच और सामने आने वाले दस्तावेजों से अधिक स्पष्ट हो सकती है।



