
Premanand Maharaj के शिष्य की मौत पर Aniruddhacharya ने किया बचाव
वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। इस घटना के बाद प्रेमानंद महाराज और उनके आश्रम को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी बीच कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने प्रेमानंद महाराज का बचाव करते हुए कहा है कि किसी शिष्य की मृत्यु के लिए उसके गुरु को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने लोगों से पूरी जानकारी के बिना संतों पर आरोप लगाने से बचने की अपील की।
अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि प्रेमानंद महाराज एक अच्छे संत हैं और उन्होंने अपनी कथाओं के जरिए करोड़ों लोगों को भक्ति से जोड़ने का काम किया है। उनके मुताबिक, प्रेमानंद महाराज ने लोगों के मन में भगवान के प्रति प्रेम और आस्था जगाई है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आलोचनाओं और आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। अनिरुद्धाचार्य का कहना था कि कई लोग पूरी बात जाने बिना खुद ही न्यायाधीश बनकर किसी के बारे में फैसला सुनाने लगते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रेमानंद महाराज ने अपने खिलाफ कही जा रही बातों पर खामोशी बनाए रखी है। अनिरुद्धाचार्य के मुताबिक, महाराज ने लोगों की आलोचनाओं के बावजूद अपने काम और भक्ति के मार्ग को जारी रखा है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जब मेंढक टर्राते हैं तो कोयल चुप हो जाती है। इसके साथ ही उन्होंने कांटों के बीच गुलाब के खिलने का जिक्र करते हुए कहा कि विरोध और आलोचना के बीच भी अच्छे काम करने वाले लोगों का महत्व बना रहता है।
अनिरुद्धाचार्य ने प्रेमानंद महाराज की सेहत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महाराज किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं और उनके शरीर में सूजन भी बनी रहती है। इसके बावजूद वह लोगों से मिलते हैं, उनकी बातें सुनते हैं और उन्हें भक्ति से जोड़ने का प्रयास करते हैं। अनिरुद्धाचार्य के अनुसार, इतनी स्वास्थ्य समस्याओं के बाद भी लोगों के मार्गदर्शन के लिए समय निकालना उनके समर्पण को दर्शाता है।
दीपक लोधी की मौत का जिक्र करते हुए अनिरुद्धाचार्य ने सवाल किया कि यदि किसी शिष्य की मृत्यु हो गई तो इसके लिए प्रेमानंद महाराज को दोषी कैसे ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मृत्यु जीवन का अटल सत्य है और धरती पर जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को एक दिन जाना होता है। उनके मुताबिक, साधु-संत भी मृत्यु से परे नहीं हैं, इसलिए किसी दुखद घटना के आधार पर बिना पूरी जानकारी के किसी संत को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है।
गौरतलब है कि दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत 25 सितंबर को वृंदावन स्थित गुरु कृपा कुंज की चौथी मंजिल से गिरने के बाद हुई थी। घटना के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। घटना से पहले और उसके आसपास के समय के सीसीटीवी फुटेज भी सामने आए हैं, जिनकी मदद से घटनाक्रम को समझने की कोशिश की जा रही है।
इस मामले में सामने आए शुरुआती विवरणों के मुताबिक, दीपक के कमरे से एक ग्राइंडर भी बरामद हुआ था और उनके शरीर पर गंभीर चोटें थीं। इन परिस्थितियों के कारण घटना को लेकर कई सवाल उठे हैं। हालांकि, मौत के पीछे की पूरी वजह और उससे जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। इसलिए घटना को लेकर लगाए जा रहे आरोपों और अटकलों को अंतिम निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा।
घटना के बाद आश्रम की व्यवस्था और वहां रह रहे लोगों से जुड़े सवाल भी उठे हैं। कुछ परिवारों ने अपने परिजनों से संपर्क नहीं हो पाने को लेकर आश्रम के बाहर विरोध जताया था। दूसरी ओर, आश्रम प्रबंधन ने मामले की जांच में पुलिस का सहयोग करने की बात कही है। इस पूरे विवाद के बीच प्रेमानंद महाराज को लेकर अलग-अलग दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है।
अनिरुद्धाचार्य के बयान ने इस मामले में एक नई चर्चा शुरू कर दी है। उन्होंने जहां प्रेमानंद महाराज के समर्थन में अपनी बात रखी, वहीं दीपक लोधी की मौत की जांच और उससे जुड़े सवालों के जवाब अभी सामने आने बाकी हैं। फिलहाल पुलिस की जांच महत्वपूर्ण है, क्योंकि घटना की परिस्थितियों, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा कि उस दिन आखिर क्या हुआ था। तब तक किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराने से बचना जरूरी है।



