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8th Pay Commission: कर्मचारियों-पेंशनर्स ने रखीं बड़ी मांगें

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केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। आयोग अलग-अलग कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और पेंशनर्स संगठनों से सुझाव और मांगें ले रहा है। इसी बीच कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े संगठनों ने वेतन, फिटमेंट फैक्टर, पेंशन, मेडिकल सुविधाओं और करियर प्रोग्रेशन से जुड़े कई अहम मुद्दे आयोग के सामने रखे हैं। हालांकि, इन मांगों को अभी 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिश नहीं माना जा सकता।

8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन नवंबर 2025 में किया गया था और इसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग का काम केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, भत्तों, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े मामलों की समीक्षा करना है। आयोग ने कर्मचारियों, पेंशनर्स और संगठनों से सुझाव लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली है और अब विभिन्न प्रतिनिधि संगठनों के साथ बैठकें कर रहा है।

कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी शामिल है। अलग-अलग संगठनों ने अपनी जरूरत और कैडर के हिसाब से अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर सुझाए हैं। कुछ संगठनों ने 3.833 या उससे अधिक फिटमेंट फैक्टर की मांग की है, जबकि कुछ ने अलग-अलग पे लेवल के लिए अलग फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव रखा है। फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल मौजूदा बेसिक पे को संशोधित कर नई वेतन संरचना तय करने में किया जाता है।

पेंशन को लेकर भी कर्मचारियों और पेंशनर्स के संगठनों की कई मांगें हैं। कुछ कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली आय में निश्चितता होनी चाहिए और बाजार से जुड़े रिटर्न पर निर्भरता कम होनी चाहिए। NPS और UPS को लेकर भी अलग-अलग संगठनों ने अपनी चिंताएं और सुझाव आयोग के सामने रखे हैं।

पेंशनर्स की तरफ से पुरानी पेंशन से जुड़े मुद्दों के अलावा न्यूनतम पेंशन, पेंशन रिवीजन, महंगाई राहत और पेंशन कम्यूटेशन से जुड़े बदलावों की मांगें भी उठी हैं। कुछ संगठनों ने यह भी मांग रखी है कि पहले से रिटायर हो चुके पेंशनर्स को भी नए वेतन आयोग के लाभों के दायरे में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए। इस मुद्दे पर संबंधित संगठनों की ओर से सरकार के विभागों के सामने प्रतिनिधित्व भी किया गया है।

मेडिकल सुविधाएं भी पेंशनर्स और कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं। संगठनों ने रिटायरमेंट के बाद बढ़ते स्वास्थ्य खर्च को देखते हुए मेडिकल सुविधाओं को मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाने की मांग की है। कुछ मांगों में केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना यानी CGHS से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार और कर्मचारियों-पेंशनर्स के लिए बेहतर मेडिकल सुरक्षा की बात कही गई है।

करियर प्रोग्रेशन और MACP यानी Modified Assured Career Progression Scheme में बदलाव की मांग भी सामने आई है। खासकर तकनीकी और रेलवे कर्मचारियों से जुड़े संगठनों ने प्रमोशन की व्यवस्था, वेतन स्तर और करियर में आगे बढ़ने के अवसरों में सुधार की जरूरत बताई है। कुछ संगठनों ने कठिन ड्यूटी, नाइट ड्यूटी, ओवरटाइम, रिस्क और हार्डशिप अलाउंस में संशोधन की मांग भी की है।

इसके अलावा कर्मचारियों की ओर से महंगाई के असर को ध्यान में रखते हुए बेसिक पे और भत्तों में पर्याप्त बढ़ोतरी की मांग की जा रही है। कुछ कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से बढ़ती महंगाई ने वास्तविक क्रय शक्ति को प्रभावित किया है, इसलिए नए वेतन ढांचे में इसका उचित ध्यान रखा जाना चाहिए। DA को बेसिक पे के साथ मर्ज करने जैसी मांगें भी कर्मचारी संगठनों के ज्ञापन में शामिल रही हैं।

फिलहाल 8वें वेतन आयोग की ओर से इनमें से किसी भी मांग को मंजूरी मिलने की घोषणा नहीं हुई है। आयोग अलग-अलग संगठनों की मांगों, सरकार की वित्तीय स्थिति, आर्थिक परिस्थितियों और अन्य संबंधित पहलुओं पर विचार करने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार करेगा। इसलिए फिटमेंट फैक्टर, वेतन वृद्धि, OPS की बहाली या मेडिकल सुविधाओं में बदलाव को लेकर चल रही चर्चाओं को अभी संभावित मांगों के तौर पर ही देखना चाहिए।

आयोग की अगली अहम बैठकों में भी कर्मचारी और पेंशनर्स से जुड़े इन्हीं मुद्दों पर चर्चा जारी रहने की उम्मीद है। 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में हितधारकों के साथ बैठक का कार्यक्रम है, जबकि अक्टूबर के अंत में मुंबई में भी बैठक निर्धारित है। इन बैठकों के जरिए अलग-अलग कर्मचारी और पेंशनर्स संगठन अपनी मांगों और सुझावों को आयोग के सामने रखेंगे। अंतिम फैसला 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और उसके बाद केंद्र सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा

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