
केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने बाड़मेर और उदयपुर में राष्ट्रीय जल संचयन एवं जन भागीदारी पुरस्कार को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रहे भ्रामक दावों पर स्पष्ट किया है कि इनमें कोई गड़बड़ी या “घोटाला” नहीं हुआ है। मंत्रालय ने कहा है कि कुछ तस्वीरों और आंकड़ों को गलत तरीके से जोड़ा जा रहा है, जबकि वास्तविकता अलग है।
बाड़मेर की कलेक्टर आईएएस टीना डाबी और उनकी बहन उदयपुर की आईएएस रीया डाबी को लेकर सोशल मीडिया पर आरोप लगे थे कि उन्होंने पुरस्कार पाने के लिए गलत/एआई-जनित फोटो आदि अपलोड किए थे। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये पोस्ट भ्रामक हैं और इनका पुरस्कार प्रक्रियाओं से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि गलती से हुई फोटो अपलोडिंग जैसी मामलों को सुधारने के निर्देश जारी किए गए हैं और अस्थायी तौर पर संबंधित पोर्टल पर डेटा अपलोडिंग को रोका गया है।
क्या हुआ विवाद:
• बाड़मेर और उदयपुर जिलों को ‘जल संचयन – जन भागीदारी’ अभियान के तहत राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कार दिया गया था, जिसमें बाड़मेर को ₹2 करोड़ और उदयपुर को ₹1 करोड़ की प्रोत्साहन राशि मिली।
• सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि कुछ स्थानों पर गलत तस्वीरें, जैसे शादी के निमंत्रण कार्ड की फोटो, अपलोड कर पुरस्कार हासिल किया गया।
• इससे जुड़े दावों पर जिलाधिकारी कार्यालयों ने स्पष्टीकरण जारी किया, जिसमें कहा गया कि यह डेटा गलती से अपलोड हुआ था और इसका पुरस्कार से कोई लिंक नहीं था। संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू की गई है।
सरकारी रुख: मंत्रालय और जिला प्रशासन दोनों ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाएँ गलत और भ्रामक हैं, और पुरस्कार वास्तव में जल संरक्षण कार्यों की सत्यापित उपलब्धियों के आधार पर दिए गए हैं।



