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बांग्लादेश में उस्मान हादी का काजी नजरुल इस्लाम की कब्र के बगल में सुपुर्द-ए-खाक

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बांग्लादेश की राजधानी ढाका में शनिवार को युवा छात्र-नेता शरीफ उस्मान हादी का सुपुर्द-ए-खाक किया गया, जहाँ उन्हें राष्ट्रीय कवि काजी नजरुल इस्लाम की कब्र के बगल में दफनाया गया। ढाका विश्वविद्यालय के परिसर में आयोजित इस अंतिम संस्कार में सैकड़ों हजारों लोग मौजूद रहे और भारी सुरक्षा व्यवस्था भी तैनात की गई थी। इस दौरान बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने जनाज़े में भाग लिया और हादी को देश के दिलों में अमर रहने वाला सलाहकार बताते हुए भावुक भाषण दिया।

उस्मान हादी 32 वर्ष के थे और इंकलाब मंच के प्रवक्ता थे, जो 2024 के छात्र-जन आंदोलन में उभरे और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासन के खिलाफ एक प्रमुख चेहरे के रूप में जाने जाते थे। 12 दिसंबर को उनके ऊपर गोलीबारी हुई थी, जिसके बाद उन्हें गंभीर अवस्था में सिंगापुर में भर्ती कराया गया, लेकिन 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गयी।

उनकी मौत के बाद बांग्लादेश भर में हिंसक प्रदर्शन और अशांति फैल गई। ढाका और अन्य प्रमुख शहरों में भारी विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें कुछ प्रदर्शनकारियों ने मीडिया संस्थानों जैसे प्रोथम आलो और द डेली स्टार के कार्यालयों पर हमला किया, सांस्कृतिक केंद्रों में तोड़फोड़ और आगजनी की भी घटनाएँ सामने आईं।

राज्य प्रशासन ने राष्ट्र व्यापी शोक की घोषणा की और सुरक्षा बलों को सड़कों पर तैनात किया, ताकि सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखा जा सके, लेकिन विरोध प्रदर्शन में भारत-विरोधी नारे भी सुने गये और राजनीतिक तनाव फिर बढ़ता दिखा। इस विरोध के बीच हादी का काजी नजरुल इस्लाम के बगल में दफनाया जाना राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है।

कुछ समर्थक इसे हादी की भूमिका और लोकप्रियता का सम्मान भी मानते हैं, जबकि आलोचक इसे विवादास्पद राजनीतिक संदेश के रूप में देखते हैं, क्योंकि काजी नजरुल इस्लाम को बांग्लादेश की सांस्कृतिक और साहित्यिक पहचान के रूप में सम्मानित किया जाता है।

देश फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनावों की ओर बढ़ रहा है, और इस बीच हिंसा तथा असंतोष की यह लहर राजनीतिक परिदृश्य को और अधिक जटिल बना रही है। सरकार ने कहा है कि हादी की हत्या की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी, जबकि विपक्ष और जनता निष्पादन के सवाल और आरोपों को लेकर गंभीर बहस में लगे हैं।

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