
उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव करने की तैयारी की जा रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य के मदरसों को विश्वविद्यालयों से जोड़ने और उन्हें मुख्यधारा की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के लिए एक पुराने कानून में संशोधन करने की योजना बना रही है। इसके तहत मदरसा शिक्षा परिषद के अंतर्गत पढ़ाए जाने वाले उच्च स्तर के पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं अब संबंधित राज्य विश्वविद्यालयों के माध्यम से कराई जा सकती हैं और सफल छात्रों को विश्वविद्यालयों की ओर से डिग्री प्रदान की जाएगी।
दरअसल, अभी तक मदरसा शिक्षा परिषद के तहत पढ़ाई करने वाले छात्रों को ‘मुंशी’, ‘मौलवी’, ‘कामिल’ और ‘फाजिल’ जैसे प्रमाणपत्र दिए जाते हैं। इनमें ‘मुंशी’ को हाईस्कूल, ‘मौलवी’ को इंटरमीडिएट, ‘कामिल’ को स्नातक और ‘फाजिल’ को परास्नातक के समकक्ष माना जाता है। लेकिन इन डिग्रियों को कई जगह औपचारिक मान्यता नहीं मिल पाती, जिससे छात्रों को उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों में दिक्कतें आती हैं। सरकार का मानना है कि यदि मदरसों को विश्वविद्यालयों से संबद्ध किया जाता है तो छात्रों को अधिक मान्यता प्राप्त डिग्री मिलेगी और उनके लिए करियर के अवसर भी बढ़ेंगे।
यह बदलाव इसलिए भी जरूरी माना जा रहा है क्योंकि पहले सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि मदरसा बोर्ड द्वारा उच्च शिक्षा की डिग्री देना यूजीसी अधिनियम के प्रावधानों से टकराता है, इसलिए ऐसी डिग्रियां केवल विश्वविद्यालय ही दे सकते हैं। अदालत के इस फैसले के बाद हजारों छात्रों का भविष्य अनिश्चित हो गया था, क्योंकि वे कामिल और फाजिल पाठ्यक्रमों में पढ़ाई कर रहे थे। अब राज्य सरकार इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए मदरसों को विश्वविद्यालयों से जोड़ने की दिशा में कदम उठा रही है।
प्रस्ताव के अनुसार ‘उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973’ में संशोधन किया जाएगा, जिसके बाद किसी जिले में स्थित मदरसा उसी जिले के विश्वविद्यालय से संबद्ध हो सकेगा। इसके बाद विश्वविद्यालय अपने अधिकार क्षेत्र के मदरसों में परीक्षाएं आयोजित करेगा और सफल विद्यार्थियों को आधिकारिक डिग्री प्रदान करेगा। इस व्यवस्था से मदरसा शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली के साथ जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य मदरसों के छात्रों को समान शैक्षिक अवसर देना है, ताकि वे देश-विदेश में आगे की पढ़ाई और रोजगार के अवसरों का लाभ उठा सकें। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव को लागू करते समय पाठ्यक्रम, मान्यता और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर सावधानीपूर्वक काम करना होगा।
राजनीतिक और शैक्षिक हलकों में इस प्रस्ताव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यदि यह संशोधन लागू हो जाता है तो उत्तर प्रदेश की मदरसा शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और हजारों छात्रों को औपचारिक विश्वविद्यालयी डिग्री का लाभ मिल सकेगा।



