
दक्षिण एशिया की रणनीतिक राजनीति में एक नया घटनाक्रम तेजी से चर्चा में आ गया है। पाकिस्तान एयरफोर्स के वरिष्ठ अधिकारी Air Vice Marshal Aurangzeb Ahmed के बांग्लादेश दौरे ने भारत समेत पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ढाका में पाकिस्तान और बांग्लादेश वायुसेना के बीच पहली बार “एयर स्टाफ टॉक” आयोजित की जा रही है, जिसे दोनों देशों के रक्षा संबंधों में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान एयरफोर्स का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 10 मई से पांच दिवसीय दौरे पर बांग्लादेश में मौजूद है। इस टीम का नेतृत्व औरंगजेब अहमद कर रहे हैं, जिन्हें पाकिस्तान एयरफोर्स का बेहद प्रभावशाली चेहरा माना जाता है। उनके साथ एयर कमोडोर शाह खालिद, अब्दुल गफूर बुजदार, ग्रुप कैप्टन मोहम्मद अली खान और विंग कमांडर हसन तारिक अजीज भी ढाका पहुंचे हैं।
यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब कुछ दिन पहले बांग्लादेश एयरफोर्स में कथित तौर पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे नेटवर्क का खुलासा हुआ था। सुरक्षा एजेंसियों ने कई अधिकारियों और नॉन-कमीशंड अधिकारियों को हिरासत में लिया था और कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। इसी घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान एयरफोर्स की उच्चस्तरीय टीम का ढाका पहुंचना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि इस बैठक में दोनों देशों के बीच पायलट ट्रेनिंग, एयर डिफेंस सहयोग, तकनीकी साझेदारी और सैन्य अनुभव साझा करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। सबसे ज्यादा चर्चा पाकिस्तान के JF-17 Thunder लड़ाकू विमान को लेकर हो रही है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक बांग्लादेश लंबे समय से अपनी वायुसेना को आधुनिक बनाने की योजना पर काम कर रहा है और इसी के तहत पाकिस्तान से JF-17 खरीदने पर बातचीत चल रही है।
JF-17 एक चीन-पाकिस्तान द्वारा संयुक्त रूप से विकसित मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे पाकिस्तान एयरफोर्स अपनी रीढ़ मानती है। यह विमान कम लागत और बहुउद्देश्यीय क्षमताओं के कारण कई देशों की रुचि का केंद्र बना हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार बांग्लादेश ने JF-17 Block 3 मॉडल में विशेष दिलचस्पी दिखाई है।
इस दौरे का एक और अहम पहलू भारत सीमा के पास बढ़ती सैन्य गतिविधियां हैं। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल लालमोनिरहाट और बोगुरा एयरबेस का दौरा कर सकता है। लालमोनिरहाट एयरबेस भारत-बांग्लादेश सीमा से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित है, जबकि बोगुरा एयरबेस का रनवे तेजी से विस्तार किया जा रहा है। इन दोनों ठिकानों पर एयर डिफेंस रडार और नई सैन्य सुविधाओं पर काम जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच बढ़ती सैन्य नजदीकी भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन सकती है। खासकर तब, जब दोनों देशों के संबंध लंबे समय तक सीमित रहे हों और अब अचानक रक्षा सहयोग तेज होता दिखाई दे रहा हो। भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।
औरंगजेब अहमद खुद भी हाल के वर्षों में काफी चर्चित रहे हैं। उन्हें पाकिस्तान एयरफोर्स का “पोस्टर बॉय” कहा जाता है और वे वायुसेना के जनसंपर्क महानिदेशक, उप प्रमुख (ऑपरेशंस) और रणनीतिक कमान के कमांडर जैसे अहम पद संभाल चुके हैं। “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान भी वे पाकिस्तान एयरफोर्स का प्रमुख चेहरा बने थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच पाकिस्तान और बांग्लादेश की यह नजदीकी आने वाले समय में नई सामरिक चुनौतियां पैदा कर सकती है। चीन पहले ही बांग्लादेश के रक्षा क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा रहा है और अब पाकिस्तान के बढ़ते सैन्य संपर्क ने भारत की रणनीतिक चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
हालांकि अभी तक न तो पाकिस्तान और न ही बांग्लादेश सरकार ने इस दौरे को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल एक औपचारिक बैठक नहीं बल्कि दक्षिण एशिया की बदलती सैन्य रणनीति का संकेत हो सकता है। आने वाले दिनों में यदि JF-17 डील या संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण को लेकर कोई बड़ा ऐलान होता है, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा राजनीति पर पड़ सकता है।



