
UN में नेतन्याहू के भाषण के दौरान दर्जनों देशों के डिप्लोमैट्स ने किया वॉकआउट
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण के दौरान गुरुवार को बड़ी संख्या में देशों के प्रतिनिधियों ने हॉल से वॉकआउट किया। जैसे ही नेतन्याहू 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने के लिए मंच पर पहुंचे, कई डिप्लोमैट्स अपनी सीटों से उठकर बाहर चले गए। इस विरोध के बीच नेतन्याहू ने बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों को “मोरल कायर” कहा और बचे हुए प्रतिनिधियों से भी बाहर जाने के लिए कहा।
नेतन्याहू के भाषण के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासभा का बड़ा हिस्सा खाली नजर आया। रिपोर्टों के मुताबिक, दर्जनों प्रतिनिधियों ने उनके भाषण का विरोध करते हुए सदन से बाहर जाने का फैसला किया। हालांकि, सभी देशों की आधिकारिक सूची अभी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है। उपलब्ध तस्वीरों में सऊदी अरब, ईरान, सूडान, ट्यूनीशिया, उज्बेकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, अल्जीरिया, मलेशिया, मोंटेनेग्रो और किर्गिस्तान समेत कई देशों की सीटें खाली दिखाई दीं।
वॉकआउट के बाद नेतन्याहू ने अपने भाषण में कहा कि अगर कुछ और प्रतिनिधि भी जाना चाहते हैं तो वे जा सकते हैं। उन्होंने विरोध करने वाले देशों और नेताओं पर इजरायल के खिलाफ दोहरे रवैये का आरोप लगाया। नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल की कार्रवाई को लेकर आलोचना करने वाले कुछ देशों के नेताओं ने कथित तौर पर निजी बातचीत में ईरान के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई की सराहना की थी। यह दावा नेतन्याहू ने अपने भाषण के दौरान किया।
नेतन्याहू ने अपने संबोधन में ईरान के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई का भी बचाव किया। उन्होंने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमलों को जरूरी बताते हुए कहा कि अगर इजरायल ने कार्रवाई नहीं की होती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी प्रशंसा की और कहा कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई में अमेरिका और इजरायल ने साथ मिलकर काम किया।
इजरायली प्रधानमंत्री ने गाजा युद्ध को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि इजरायल ने नरसंहार नहीं किया, बल्कि उनके अनुसार इजरायल ने नरसंहार को रोका। दूसरी ओर, इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार आलोचना होती रही है और इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी देशों के बीच मतभेद दिखाई दिए।
अपने करीब 40 मिनट के भाषण में नेतन्याहू ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी पर भी निशाना साधा। ममदानी ने पहले नेतन्याहू को युद्ध अपराधों से जुड़े आरोपों के संदर्भ में आलोचना की थी। नेतन्याहू ने ममदानी पर इजरायल और उसके सैनिकों के खिलाफ गलत बातें फैलाने का आरोप लगाया। ममदानी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए नेतन्याहू के भाषण की आलोचना की।
नेतन्याहू ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन और कतर पर भी निशाना साधा। उन्होंने दोनों देशों पर इजरायल के खिलाफ गलत सूचनाएं फैलाने का आरोप लगाया। इसके अलावा उन्होंने ब्रिटेन और फ्रांस की ओर से इजरायली बस्तियों और पश्चिमी तट को लेकर की गई आलोचना पर भी प्रतिक्रिया दी। ये टिप्पणियां नेतन्याहू के उस भाषण का हिस्सा थीं, जिसमें उन्होंने इजरायल की क्षेत्रीय और सैन्य नीतियों का बचाव किया।
भाषण के दौरान नेतन्याहू ने 2024 में लेबनान में हिजबुल्लाह सदस्यों को निशाना बनाने वाले पेजर विस्फोटों का भी जिक्र किया और मंच पर एक पेजर दिखाया। उन्होंने हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई को अपनी सरकार की उपलब्धियों में गिनाया। इसके साथ ही उन्होंने ईरान को लेकर अपनी चिंताओं और इजरायल की सुरक्षा नीति पर भी विस्तार से बात की।
संयुक्त राष्ट्र परिसर के बाहर भी नेतन्याहू के दौरे और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों के विरोध में प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने गाजा और ईरान को लेकर अलग-अलग नारे लगाए। इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा के अंदर हुआ वॉकआउट नेतन्याहू के भाषण का प्रमुख घटनाक्रम बन गया। वहीं, कुछ प्रतिनिधि अपनी सीटों पर मौजूद रहे और नेतन्याहू के समर्थकों ने उनके भाषण के दौरान उनका समर्थन किया



