
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हालिया मुलाकात के बीच चीन के कथित गुप्त परमाणु परीक्षणों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अमेरिकी प्रशासन ने चीन
पर बेहद कम क्षमता वाले गुप्त परमाणु परीक्षण करने का आरोप लगाया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इन आरोपों को लेकर वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच बंद कमरे में बातचीत भी हुई है। हालांकि चीन ने इन आरोपों को खारिज किया है और सार्वजनिक रूप से ऐसे परीक्षण किए जाने की पुष्टि नहीं की है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में चीन का लोप नूर परमाणु परीक्षण क्षेत्र है। अमेरिका का आरोप है कि चीन ने जून 2020 में यहां बेहद कम क्षमता वाला परमाणु परीक्षण किया था। फरवरी 2026 में अमेरिकी अधिकारियों ने इस कथित परीक्षण के बारे में कुछ अतिरिक्त दावे भी किए थे। वहीं, व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि यानी CTBT से जुड़े अंतरराष्ट्रीय निगरानी तंत्र ने 22 जून 2020 को लोप नूर के पुराने परीक्षण क्षेत्र से 100 किलोमीटर से अधिक दूरी पर दो बेहद छोटे भूकंपीय संकेत दर्ज किए थे। हालांकि इन संकेतों को परमाणु विस्फोट के निर्णायक प्रमाण के रूप में सार्वजनिक तौर पर स्थापित नहीं किया गया है।
अमेरिका और चीन के बीच विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देश परमाणु हथियारों से जुड़ी अपनी क्षमताओं को लगातार आधुनिक बना रहे हैं। हाल के वर्षों में चीन के परमाणु हथियारों के जखीरे में तेजी से बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। विशेषज्ञ आकलनों के मुताबिक चीन के पास अब सैकड़ों परमाणु हथियार हैं और वह जमीन, समुद्र तथा हवा से परमाणु हथियार पहुंचाने की क्षमता वाले सिस्टम विकसित कर रहा है। हालांकि चीन के वास्तविक परमाणु भंडार और उसकी रणनीतिक तैयारियों से जुड़ी कई जानकारियां गोपनीय हैं।
अमेरिका का आरोप सिर्फ परमाणु विस्फोटों तक सीमित नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों ने चीन पर ऐसे लो-यील्ड या सुपरक्रिटिकल प्रयोगों को लेकर भी सवाल उठाए हैं, जिनमें परमाणु विस्फोट जैसी पूर्ण प्रक्रिया नहीं होती, लेकिन परमाणु हथियारों के विकास और विश्वसनीयता से जुड़ी तकनीकी जानकारी हासिल की जा सकती है। चीन का पक्ष इन आरोपों से अलग है और वह ऐसे गुप्त परमाणु परीक्षण करने से इनकार करता रहा है।
यहां CTBT को समझना भी जरूरी है। Comprehensive Nuclear-Test-Ban Treaty का उद्देश्य दुनिया में सभी तरह के परमाणु विस्फोटों पर रोक लगाना है। हालांकि यह संधि अभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू नहीं हुई है, क्योंकि इसके प्रभावी होने के लिए कुछ प्रमुख देशों का अनुसमर्थन जरूरी है। चीन और अमेरिका दोनों ने CTBT पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन दोनों ने अभी तक इसे अनुमोदित नहीं किया है। भारत ने भी इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि चीन के कथित कम क्षमता वाले परीक्षण CTBT की भावना से जुड़े सवाल खड़े करते हैं। दूसरी तरफ, संधि के कानूनी रूप से लागू नहीं होने की वजह से इसके निरीक्षण और सत्यापन से जुड़े कई प्रावधान अभी प्रभावी नहीं हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक चीन, रूस और अमेरिका तीनों ही यह कहते रहे हैं कि वे परमाणु विस्फोट परीक्षणों पर रोक से जुड़े CTBT के प्रावधानों का पालन कर रहे हैं, जबकि वॉशिंगटन ने चीन के कथित परीक्षणों को लेकर अलग सवाल उठाए हैं।
इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि अमेरिका को कथित गुप्त गतिविधियों के बारे में जानकारी कैसे मिलती है। परमाणु परीक्षणों की निगरानी के लिए दुनिया भर में भूकंपीय, हाइड्रो-अकॉस्टिक और अन्य सेंसर का नेटवर्क मौजूद है। CTBTO का अंतरराष्ट्रीय निगरानी तंत्र भी धरती के भीतर होने वाली असामान्य गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है। हालांकि बेहद कम क्षमता वाले प्रयोगों की प्रकृति को लेकर तकनीकी विश्लेषण काफी जटिल हो सकता है। इसी वजह से किसी छोटे भूकंपीय संकेत को सीधे परमाणु विस्फोट घोषित करना हमेशा संभव नहीं होता।
चीन का परमाणु विस्तार अमेरिका के लिए पहले से ही रणनीतिक चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार बीजिंग अपने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ नई मिसाइल प्रणालियों, पनडुब्बियों और अन्य डिलीवरी सिस्टम पर भी काम कर रहा है। हालांकि विशेषज्ञों में इस बात को लेकर एक राय नहीं है कि चीन कब अमेरिका के बराबर परमाणु क्षमता हासिल कर सकता है। कुछ आकलन तेजी से बढ़ती क्षमता की ओर संकेत करते हैं, जबकि दूसरे विशेषज्ञ उपलब्ध आंकड़ों की अनिश्चितता के कारण ऐसे निष्कर्षों में सावधानी बरतने की बात कहते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि परमाणु मुद्दे की यह चर्चा ट्रंप और शी जिनपिंग की हालिया मुलाकात के दौरान अमेरिका-चीन संबंधों के व्यापक तनाव के बीच सामने आई है। दोनों नेताओं ने 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में मुलाकात की और रणनीतिक स्थिरता तथा दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारी में व्यापार, तकनीक, ताइवा



