Advertisement
दिल्ली (यूटी)लाइव अपडेट
Trending

सरकार से बातचीत को तैयार CJP, निष्पक्ष स्थान पर वार्ता की रखी शर्त

Advertisement
Advertisement

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी CJP (Cockroach Janata Party) के आंदोलन के बीच संगठन ने केंद्र सरकार के साथ बातचीत के संकेत दिए हैं। CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि यदि सरकार आंदोलन का समाधान चाहती है तो संगठन संवाद के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन बातचीत किसी मंत्री के आवास या सरकारी कार्यालय में नहीं बल्कि जंतर-मंतर अथवा किसी निष्पक्ष (न्यूट्रल) स्थान पर होनी चाहिए। उनका कहना है कि आंदोलन जनता का है और इसलिए वार्ता भी ऐसी जगह होनी चाहिए जहां पारदर्शिता बनी रहे तथा दोनों पक्ष समान स्तर पर बातचीत कर सकें।

आशुतोष रांका ने बताया कि सरकार की ओर से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की गई है, लेकिन CJP का मानना है कि केवल औपचारिक मुलाकात से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में छात्रों और युवाओं की चिंताओं का समाधान चाहती है तो उसे ठोस आश्वासन के साथ आगे आना होगा। संगठन ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी सार्थक वार्ता से पीछे नहीं हटेगा, लेकिन बातचीत का उद्देश्य केवल आंदोलन समाप्त कराना नहीं बल्कि मांगों पर वास्तविक निर्णय होना चाहिए।

CJP ने अपनी चार प्रमुख मांगों को एक बार फिर दोहराया है। संगठन का कहना है कि पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। दूसरी मांग कथित परीक्षा अनियमितताओं और उससे जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा देने की है। तीसरी मांग शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों और आंदोलनकारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई न करने की गारंटी है। चौथी मांग परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने और व्यापक सुधारों पर संसद में गंभीर चर्चा सुनिश्चित करने की है। संगठन का कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा, जहां बड़ी संख्या में छात्र, युवा और विभिन्न राज्यों से आए समर्थक मौजूद रहे। आंदोलन के नेताओं का कहना है कि यह केवल किसी एक परीक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने की लड़ाई है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अपील की कि वह आंदोलन को कानून-व्यवस्था के नजरिए से देखने के बजाय छात्रों की समस्याओं के समाधान का अवसर माने।

इस बीच संगठन के अन्य नेताओं ने भी सरकार के रुख पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में संवाद चाहती है तो उसे आंदोलनकारियों के बीच आकर बातचीत करनी चाहिए। CJP का दावा है कि जंतर-मंतर इस समय “जनता की अदालत” बन चुका है और यहीं पर पारदर्शी तरीके से चर्चा हो सकती है। संगठन ने यह भी कहा कि किसी बंद कमरे में होने वाली बैठक से लोगों का भरोसा नहीं बनेगा।

दूसरी ओर केंद्र सरकार की ओर से संकेत मिले हैं कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए दरवाजे खुले हैं। हालांकि अभी तक दोनों पक्षों के बीच औपचारिक वार्ता की तारीख और स्थान तय नहीं हो पाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार और CJP के बीच किसी निष्पक्ष स्थान पर बातचीत होती है तो इससे गतिरोध खत्म होने की संभावना बन सकती है। वहीं यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।

आशुतोष रांका ने यह भी चेतावनी दी कि यदि सरकार ने आंदोलन को नजरअंदाज किया तो आने वाले दिनों में विरोध और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई का प्रदर्शन केवल शुरुआत था और आवश्यकता पड़ने पर देशभर से बड़ी संख्या में युवा दिल्ली पहुंचकर आंदोलन में शामिल होंगे। संगठन का दावा है कि वह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखेगा, लेकिन अपनी प्रमुख मांगों से पीछे नहीं हटेगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share