
भारत और पाकिस्तान को आजाद हुए 79 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन दोनों देशों की विकास यात्रा आज बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है। एक समय एक ही ब्रिटिश शासन के अधीन रहे और लगभग एक साथ आजाद हुए दोनों देशों के बीच अब अर्थव्यवस्था, तकनीक, अंतरिक्ष, राजनीतिक स्थिरता, आतंकवाद और सामाजिक परिस्थितियों के मामले में बड़ा अंतर दिखाई देता है। हाल के बयानों और दोनों देशों की मौजूदा स्थिति की तुलना करते हुए यह सवाल फिर चर्चा में है कि आखिर 79 सालों में भारत और पाकिस्तान के बीच इतना बड़ा फासला कैसे पैदा हुआ।
रिपोर्ट में भारत और पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं के हालिया बयानों का जिक्र करते हुए दोनों देशों की प्राथमिकताओं में अंतर को रेखांकित किया गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के साथ तनाव और जवाबी कार्रवाई की बात कही, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सद्भाव, भाईचारे और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेताओं के बयानों के बीच का अंतर दोनों देशों की मौजूदा राजनीतिक और विकास संबंधी सोच को भी दर्शाता है।
सबसे बड़ा अंतर दोनों देशों की अर्थव्यवस्था में नजर आता है। रिपोर्ट में विश्व बैंक के ताजा GDP आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 3.96 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है, जबकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था करीब 407 अरब डॉलर है। यानी भारतीय अर्थव्यवस्था पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था से लगभग 10 गुना बड़ी बताई गई है। भारत जहां दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहीं पाकिस्तान आर्थिक संकट, कर्ज और महंगाई जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है।
गरीबी के मामले में भी दोनों देशों के आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आता है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में 2024-25 के दौरान गरीबी दर बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई, जबकि 2018-19 में यह 21.8 प्रतिशत थी। दूसरी ओर, भारत में अत्यधिक गरीबी की दर 2022-23 में 5.3 प्रतिशत बताई गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत ने गैर-मौद्रिक गरीबी को कम करने के लिए कई क्षेत्रों में प्रगति की है।
आतंकवाद पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बना हुआ है। रिपोर्ट में पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि जुलाई 2026 पाकिस्तान के लिए बेहद हिंसक महीनों में शामिल रहा। इस दौरान कम से कम 606 लोगों की मौत और 232 लोगों के घायल होने की बात कही गई है। वहीं, 2026 की शुरुआत से अब तक पाकिस्तान में 3145 आतंकवादी घटनाएं दर्ज होने का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2022 के बाद से पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़ी हिंसा और मौतों में लगातार वृद्धि देखी गई है।
तकनीक और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी दोनों देशों की स्थिति में बड़ा अंतर बताया गया है। भारत ने चंद्रयान जैसे मिशनों के जरिए अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं और आज दूसरे देशों के उपग्रहों को भी अंतरिक्ष में पहुंचाने की क्षमता रखता है। भारत में निजी क्षेत्र की कंपनियां भी अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। वहीं, रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान अपने पहले लूनर रोवर ‘जिन्ना-1’ को 2029 में चंद्रमा पर भेजने की तैयारी कर रहा है और इसके लिए चीन के रॉकेट का इस्तेमाल करने की योजना है।
पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति भी लंबे समय से अस्थिर बनी हुई है। रिपोर्ट में सेना के बढ़ते प्रभाव, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल और विपक्षी दलों पर कार्रवाई जैसे मुद्दों का जिक्र किया गया है। इमरान खान 2023 से जेल में हैं और उनके समर्थक लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि उनके खिलाफ दर्ज कई मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक अस्थिरता और सेना की मजबूत भूमिका पाकिस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।
बलूचिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में भी लंबे समय से असंतोष और विरोध की स्थिति बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बलूचिस्तान में अलगाववाद और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां पाकिस्तान के लिए गंभीर समस्या हैं। वहीं, आर्थिक दबाव, राजनीतिक अस्थिरता और आंतरिक हिंसा ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
हालांकि रिपोर्ट यह भी स्वीकार करती है कि भारत के सामने भी कई बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं और विकास के बावजूद देश को गरीबी, बेरोजगारी, सामाजिक असमानता और अन्य मुद्दों से निपटना है। लेकिन दोनों देशों के बीच मुख्य अंतर यह बताया गया है कि भारत ने अर्थव्यवस्था, तकनीक, अंतरिक्ष और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने पर लगातार काम किया है, जबकि पाकिस्तान अभी भी राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट, आतंकवाद और सैन्य प्रभाव के जटिल चक्र से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाया है।
79 साल की इस यात्रा में भारत और पाकिस्तान की तुलना केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह उन नीतियों, राजनीतिक प्राथमिकताओं और संस्थागत व्यवस्थाओं की कहानी भी है, जिन्होंने दोनों देशों की दिशा तय की। भारत जहां विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने की बात कर रहा है, वहीं पाकिस्तान के सामने अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने, आतंकवाद से निपटने और राजनीतिक व्यवस्था में स्थिरता लाने जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।



