
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी और इजराइली सैन्य गतिविधियों को लेकर सामने आ रही रिपोर्ट्स ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका और इजराइल अगले हफ्ते ईरान पर बड़े सैन्य हमले की तैयारी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमताओं और क्षेत्रीय प्रभाव को कमजोर करने के उद्देश्य से की जा सकती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम और इजराइल की सैन्य नेतृत्व के बीच लगातार उच्चस्तरीय बैठकें चल रही हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता के बेहद करीब पहुंच चुका है। इसी कारण वॉशिंगटन और तेल अवीव दोनों अब सैन्य विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। अमेरिकी ऊर्जा सचिव Chris Wright ने हाल ही में कहा था कि ईरान “खतरनाक रूप से परमाणु हथियार के करीब” पहुंच गया है।
दरअसल 2026 की शुरुआत से ही अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच हालात लगातार बिगड़ते रहे हैं। फरवरी 2026 में अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त रूप से ईरान के कई सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए थे। हालांकि बाद में अस्थायी युद्धविराम हुआ, लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
अब नई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु वार्ताएं लगभग ठप पड़ चुकी हैं। ईरान ने यूरेनियम संवर्धन रोकने से इनकार कर दिया है, जबकि अमेरिका चाहता है कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करे। इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी और इजराइली खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यदि अभी कार्रवाई नहीं की गई तो ईरान भविष्य में और ज्यादा मजबूत सैन्य शक्ति बन सकता है।
इजराइल ने भी अपने एयर डिफेंस सिस्टम को हाई अलर्ट पर रखा है। तेल अवीव को डर है कि अगर हमला हुआ तो ईरान बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर सकता है। इससे पहले भी ईरान कई बार इजराइली शहरों को निशाना बना चुका है। हालिया संघर्ष में इजराइल के कई इलाकों में भारी नुकसान की खबरें सामने आई थीं।
इस बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। दुनिया के बड़े तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़ा हमला किया तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल सप्लाई और शेयर बाजारों पर पड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। चीन, रूस और कई यूरोपीय देशों ने भी चेतावनी दी है कि नया युद्ध पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर सकता है। हालांकि फिलहाल अमेरिका और इजराइल की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी सैन्य कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जिस तरह सैन्य तैयारियों और राजनीतिक बयानों में तेजी आई है, उससे आशंका बढ़ गई है कि आने वाले दिनों में क्षेत्र में बड़ा संघर्ष देखने को मिल सकता है।



