
मध्य पूर्व में जारी तनाव अब वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष और युद्धविराम को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण सैकड़ों जहाज समुद्र में फंस गए हैं। तेल टैंकरों से लेकर मालवाहक जहाजों तक, हजारों नाविक खाड़ी क्षेत्र में महीनों से इंतजार कर रहे हैं।
इस बीच दुनिया भर की निगाहें संभावित अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर टिकी हुई हैं, जिससे इस संकट के खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाला जहाजों का ट्रैफिक लगभग ठप हो चुका है। ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर कड़े नियंत्रण लागू कर दिए हैं और कई जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी गई है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसियों का कहना है कि हजारों नाविक और करीब दो हजार जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं।
कई जहाजों को भोजन, ईंधन और मेडिकल सपोर्ट जैसी बुनियादी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस संकट का असर भारत पर भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 40 से ज्यादा भारत आने वाले जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं। इनमें तेल, गैस और अन्य जरूरी सामान लेकर आने वाले जहाज भी शामिल हैं। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक लागत पर पड़ सकता है।
दरअसल यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब अमेरिका और इजरायल ने फरवरी 2026 में ईरान पर बड़े हवाई हमले किए। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण बढ़ा दिया और कई विदेशी जहाजों की आवाजाही रोक दी। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी कि बिना अनुमति कोई जहाज इस मार्ग से नहीं गुजर सकेगा। इसके बाद दुनिया की बड़ी शिपिंग कंपनियों ने भी अपने जहाज रोक दिए।
हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई जहाजों पर हमलों की खबरें भी सामने आई हैं। कुछ जहाज ड्रोन और मिसाइल हमलों का शिकार हुए, जबकि कई जहाजों में आग लगने और नाविकों की मौत की घटनाएं भी दर्ज की गईं। एक रिपोर्ट में बताया गया कि अब तक दर्जनों जहाजों को नुकसान पहुंच चुका है और कई नाविक मारे गए या लापता हैं। इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर बातचीत तेज हो गई है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के बीच एक अस्थायी समझौते पर चर्चा चल रही है, जिसमें युद्ध रोकने, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने और आगे परमाणु मुद्दों पर बातचीत का रास्ता तैयार करने की योजना शामिल है। पाकिस्तान इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
हालांकि जमीन पर हालात अभी भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान लगातार अमेरिका पर युद्धविराम उल्लंघन के आरोप लगा रहा है। वहीं अमेरिका का कहना है कि वह केवल अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सैन्य कार्रवाई कर रहा है। अमेरिकी नौसेना ने दावा किया है कि उसने हाल ही में होर्मुज में अपने जहाजों पर हुए ईरानी हमलों को नाकाम किया। विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन है।
दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यह संकट लंबा खिंचता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने पहले ही चेतावनी दी है कि ऊर्जा संकट आने वाले महीनों तक जारी रह सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि ईरान इस समुद्री मार्ग को अपने सबसे बड़े रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। कुछ विशेषज्ञों ने इसे “वैश्विक आर्थिक दबाव का नया हथियार” तक बताया है।
यही कारण है कि अमेरिका, खाड़ी देश, यूरोप और एशिया के बड़े राष्ट्र इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अब दुनिया को उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत सफल होगी और होर्मुज का समुद्री मार्ग दोबारा सामान्य हो सकेगा। लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ, तो यह संकट वैश्विक ऊर्जा और व्यापार व्यवस्था के लिए आने वाले समय में और बड़ा खतरा बन सकता है।



