
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक बार फिर अपनी देश वापसी को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि वह दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटेंगी। हसीना अगस्त 2024 में सत्ता से बेदखल होने के बाद भारत आ गई थीं और तब से भारत में रह रही हैं। अब उनका दिसंबर में वापस लौटने का दावा ऐसे समय आया है, जब बांग्लादेश में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ा हुआ है।
हसीना ने अपने वापसी के फैसले को लेकर कहा है कि वह परिणामों से डरने वाली नहीं हैं। उनके सामने गिरफ्तारी और जेल जाने का खतरा है, जबकि बांग्लादेश में उन्हें एक मामले में अनुपस्थिति में मौत की सजा भी सुनाई जा चुकी है। इसके बावजूद उन्होंने दिसंबर में स्वदेश लौटने की बात दोहराई है। उनके मुताबिक, उनका उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं बल्कि बांग्लादेश को लोकतांत्रिक रास्ते पर वापस लाना और देश के लोगों की सेवा करना है।
शेख हसीना का यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश की राजनीति में उनके और उनकी पार्टी अवामी लीग को लेकर तनाव बना हुआ है। हसीना के भारत में रहने को लेकर ढाका लगातार सवाल उठाता रहा है। बांग्लादेश ने भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग भी की है। नवंबर 2025 में बांग्लादेश के एक ट्रिब्यूनल ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में अनुपस्थिति में दोषी ठहराया था और मौत की सजा सुनाई थी। भारत ने प्रत्यर्पण अनुरोध के कानूनी और न्यायिक पहलुओं की समीक्षा करने की बात कही है।
हसीना ने अपने ऊपर लगे आरोपों और सजा को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की जा रही है। दूसरी तरफ बांग्लादेश की मौजूदा सरकार और उनके राजनीतिक विरोधी उनके शासनकाल के दौरान हुई हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। इस वजह से उनकी संभावित वापसी सिर्फ व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति के लिए बड़ा घटनाक्रम मानी जा रही है।
हसीना ने अगस्त में नई दिल्ली से एक वर्चुअल कार्यक्रम के जरिए भी अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने अवामी लीग पर लगी पाबंदी हटाने की मांग की और अपनी पार्टी को राजनीतिक प्रक्रिया में वापस लाने की बात कही। इस बयान के बाद ढाका और नई दिल्ली के बीच भी कूटनीतिक तनाव बढ़ा। बांग्लादेश ने भारत से आग्रह किया था कि उसकी जमीन का इस्तेमाल ऐसी राजनीतिक गतिविधियों के लिए न होने दिया जाए, जिन्हें ढाका अपने खिलाफ अस्थिरता पैदा करने वाला मानता है। भारत ने स्पष्ट किया था कि वह उस निजी कार्यक्रम के आयोजन से जुड़ा नहीं था।
शेख हसीना की वापसी की घोषणा का असर भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी पड़ सकता है। पिछले कुछ समय से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव देखने को मिला है। हसीना के भारत में रहने, उनके प्रत्यर्पण की मांग और बांग्लादेश की नई राजनीतिक दिशा को लेकर दोनों देशों के बीच कई मुद्दे लंबित हैं। हालिया विश्लेषणों में यह भी सामने आया है कि ढाका की विदेश नीति भारत से कुछ हद तक दूरी बनाकर चीन और पाकिस्तान के साथ संबंध मजबूत करने की दिशा में बढ़ रही है।
हसीना की वापसी की राह हालांकि आसान नहीं होगी। अगर वह वास्तव में दिसंबर में बांग्लादेश लौटती हैं तो उन्हें वहां चल रहे कानूनी मामलों का सामना करना पड़ सकता है। उनकी पार्टी अवामी लीग की राजनीतिक स्थिति भी बदल चुकी है और पार्टी पर राजनीतिक गतिविधियों को लेकर प्रतिबंध लागू है। ऐसे में उनकी वापसी से बांग्लादेश में राजनीतिक तनाव और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिसंबर में शेख हसीना वास्तव में बांग्लादेश लौटती हैं या नहीं। फिलहाल उनका दावा राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि करीब 2 साल से भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री ने पहली बार अपनी वापसी के लिए एक स्पष्ट समयसीमा बताई है। अगर वह अपने ऐलान पर कायम रहती हैं तो दिसंबर का महीना बांग्लादेश की राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।



