
1 फरवरी 2026 को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेश में पढ़ाई और चिकित्सा इलाज पर पड़ने वाले टैक्स (Tax Collected at Source – TCS) में महत्वपूर्ण कटौती की घोषणा की है, जिससे भारतीय छात्रों और उनके परिवारों तथा उन लोगों को जबरदस्त वित्तीय राहत मिलने की उम्मीद है जो विदेश में शिक्षा या उपचार के लिए पैसे भेजते हैं।
बजट भाषण के दौरान सीतारमण ने बताया कि लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य-सेवाओं के लिए भेजे जाने वाले धन पर पहले 5 % TCS लिया जाता था, जिसे अब 2 % तक घटा दिया गया है। इसका मतलब है कि विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों या इलाज के लिए पैसे भेजने वाले परिवार अब टैक्स के रूप में कम भुगतान करेंगे, जिससे कुल खर्च पर सीधा असर पड़ेगा और यह विदेश अध्ययन/इलाज को अधिक किफ़ायती बनाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से उन परिवारों और छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी जो विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने की योजना बना रहे हैं, क्योंकि अब उन्हें धन भेजने की लागत कम होगी। इससे न केवल वर्तमान छात्रों को मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य में विदेश अध्ययन की सोच रखने वाले छात्रों के लिए भी योजनाएँ और अधिक सुलभ बनेंगी।
इसके अलावा, यह कदम स्वास्थ्य-सम्बंधित इलाज के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर भी लागू होगा, जिससे विदेशी अस्पतालों में इलाज हेतु भेजे जाने वाली रकम पर टैक्स का बोझ कम होगा। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए विदेश जाने वाले मरीजों और उनके परिवारों को भी आर्थिक राहत मिल सकती है।
बजट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि TCS की यह नई दर विदेश यात्रा पर भी लागू होगी, जिससे पर्यटन-प्रेमियों और उन लोगों को भी लाभ मिलेगा जो सालाना ₹7 लाख से अधिक विदेश खर्च करते हैं। इस बदलाव के साथ अब विदेश टूर पैकेजों पर भी TCS मात्र 2 % होगा, जो पहले अधिकतम 20 % तक था और लोगों की जेब पर बड़ा बोझ डालता था।
विशेषज्ञों ने कहा कि इस प्रकार की TCS दरों में कटौती बजट की उस व्यापक नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य टैक्स प्रणाली को करदाताओं-अनुकूल बनाना और प्रमुख व्यक्तिगत खर्चों पर टैक्स के अग्रिम बोझ को कम करना है। इससे वित्तीय वर्ष 2026-27 में विदेश से जुड़े खर्चों को पारदर्शी और सरल बनाने में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, बजट 2026 में TCS दरों में यह बदलाव भारतीय छात्रों, परिवारों और उन व्यक्तियों के लिए सकारात्मक ख़बर है जो विदेश में शिक्षा या इलाज को प्राथमिकता देते हैं। यह निर्णय विदेशों में गुणवत्ता-पूर्ण शिक्षा और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की ओर बढ़ने वाले भारतीयों के लिए आर्थिक बोझ को कम करेगा और उन्हें लक्ष्य हासिल करने के रास्ते को आसान बनाएगा।



