
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों की ओर से अमेरिकी ठिकानों और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कथित कोशिश के बाद अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में कई ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार यह कार्रवाई उन समूहों के खिलाफ की गई, जिन पर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के समर्थन से ड्रोन और मिसाइल हमलों की योजना बनाने का आरोप है।
रिपोर्टों के मुताबिक, हाल ही में ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य बलों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने का प्रयास किया गया था, जिन्हें अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। इसके बाद अमेरिका और सऊदी अरब ने संयुक्त सैन्य अभियान शुरू करते हुए इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के कई ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन समूहों द्वारा लगातार ड्रोन हमलों और मिसाइल हमलों की कोशिश की जा रही थी, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया था।
बताया जा रहा है कि जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनका इस्तेमाल कथित तौर पर हथियारों के भंडारण, ड्रोन संचालन और मिसाइल गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। अमेरिकी सेना का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य भविष्य में होने वाले हमलों को रोकना और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों तथा सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि इन हमलों में कितने लड़ाके मारे गए या कितना नुकसान हुआ, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
इस घटनाक्रम के बीच सऊदी अरब ने भी दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश के तेल प्रतिष्ठानों की ओर बढ़ रहे कई ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया। वहीं लाल सागर क्षेत्र में एक सऊदी तेल टैंकर को भी निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ता है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका, ईरान और उसके समर्थित समूहों के बीच जारी टकराव अब केवल इराक या सीरिया तक सीमित नहीं रह गया है। इसका प्रभाव पूरे मध्य पूर्व पर दिखाई दे रहा है। हाल के महीनों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और समुद्री मार्गों पर बढ़ते हमलों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को और जटिल बना दिया है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का कहना है कि वे अपने सैन्य ठिकानों और रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई जारी रखेंगे, जबकि ईरान समर्थित समूह इन अभियानों को क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का जवाब बताते रहे हैं।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी हुई है। संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यदि दोनों पक्षों के बीच सैन्य गतिविधियां इसी तरह जारी रहीं तो मध्य पूर्व में व्यापक संघर्ष की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहा है, ताकि क्षेत्र में स्थिरता कायम रह सके और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर किसी बड़े संकट का असर न पड़े।



