Advertisement
उत्तर प्रदेशलाइव अपडेट
Trending

आजमगढ़ में 8 घंटे चला बंधक संकट,

Advertisement
Advertisement

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में मंगलवार शाम से शुरू हुआ बंधक संकट करीब आठ घंटे बाद पुलिस मुठभेड़ में खत्म हुआ। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में अरविंद सिंह पर अपनी पत्नी और दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। इसके बाद वह अपने तीन बच्चों को लेकर घर के अंदर एक कमरे में बंद हो गया। करीब सात घंटे तक पुलिस ने बातचीत और समझाने की कोशिश की, लेकिन आरोपी बच्चों को बाहर निकालने के लिए तैयार नहीं हुआ। बाद में घर के अंदर से गोली चलने की आवाज आने के बाद पुलिस ने स्टन ग्रेनेड और टियर गैस का इस्तेमाल करते हुए घर में प्रवेश किया। जवाबी फायरिंग में अरविंद घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई।

पुलिस के मुताबिक, पूरे घटनाक्रम की शुरुआत घर में चल रही पूजा के दौरान विवाद से हुई। अरविंद की मां ने उसके भाई सुनील की 2019 में हुई हत्या के बाद उसकी आत्मा की शांति के लिए घर में धार्मिक अनुष्ठान रखा था। पूजा के लिए कुछ पुजारी घर पहुंचे थे। पुलिस के अनुसार, अरविंद ने पुजारियों के वहां आने का विरोध किया था। मंगलवार को जब वह घर पहुंचा तो उसने पुजारियों की मौजूदगी पर सवाल उठाया और उनके आधार कार्ड देखने की मांग की। इसके बाद विवाद बढ़ा और आरोप है कि उसने फायरिंग कर दी। इस गोलीबारी में उसकी पत्नी बबीता और दो पुजारियों की मौत हो गई।

मृतकों की पहचान बबीता (32), महेंद्र पाठक (60) और अखिलेश मिश्रा (50) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, पूजा में मौजूद दो अन्य पुजारी किसी तरह बच निकलने में सफल रहे। पत्नी और दोनों पुजारियों की हत्या के बाद अरविंद ने अपने तीन बच्चों को कमरे के अंदर बंद कर लिया और खुद भी वहीं मौजूद रहा। उसके पास लाइसेंसी रिवॉल्वर थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और पूरे घर को घेर लिया गया। वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे।

पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना था। अधिकारियों ने कई घंटे तक अरविंद से बातचीत की और उससे सरेंडर करने तथा बच्चों को बाहर भेजने की अपील की। पुलिस के मुताबिक, वह लगातार बातचीत के दौरान सुबह तक इंतजार करने की बात कहता रहा और घर से बाहर आने के लिए तैयार नहीं हुआ। करीब सात घंटे तक पुलिस ने संयम के साथ स्थिति को संभालने की कोशिश की। इस दौरान घर के आसपास सुरक्षा घेरा बनाए रखा गया और किसी भी जल्दबाजी से बचने का प्रयास किया गया।

इसके बाद अचानक घर के अंदर से गोली चलने की आवाज आई। पुलिस के मुताबिक, अरविंद ने अपने करीब 10 साल के बेटे शौर्य को गोली मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। गोली चलने की आवाज के बाद पुलिस ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। टीम ने घर में प्रवेश के लिए स्टन ग्रेनेड और टियर गैस का इस्तेमाल किया और दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई। पुलिस का कहना है कि टीम के अंदर पहुंचते ही अरविंद ने फायरिंग शुरू कर दी। उसके पास छह राउंड वाली रिवॉल्वर थी और उसने सभी गोलियां चला दीं।

इसके जवाब में पुलिस टीम ने भी फायरिंग की। इस दौरान अरविंद घायल हो गया। पुलिस के अनुसार, घर के अंदर मौजूद बच्चों को बाहर निकालने की कोशिश के दौरान एक बच्चा गोली लगने से गंभीर रूप से घायल था, जबकि दो बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, घायल शौर्य को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई। वहीं अरविंद को भी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। उसकी दो बेटियों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकालकर परिजनों को सौंप दिया।

ऑपरेशन के दौरान पुलिस और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद थे। एडीजी वाराणसी जोन नवीन अरोड़ा और डीआईजी सुनील कुमार सिंह समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरे ऑपरेशन की निगरानी की। इसके अलावा फॉरेंसिक टीम और एटीएस कमांडो टीम को भी मौके पर लगाया गया था। पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ में किसी पुलिसकर्मी को गोली नहीं लगी। घटनास्थल से हथियार और अन्य साक्ष्य जुटाए गए हैं, जिन्हें जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।

घटना के बाद तीनों मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि पूजा के दौरान विवाद किस वजह से इतना बढ़ा और फायरिंग की पूरी घटना किस क्रम में हुई। मौके से मिले साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, मामले में सामने आए सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी जांच का अहम हिस्सा होगी।

इस घटना ने शंभूपुर गांव में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। एक तरफ घर के अंदर कई घंटों तक बच्चे बंधक स्थिति में रहे, वहीं बाहर पुलिस और सुरक्षा बलों की टीमें तैनात रहीं। करीब सात घंटे तक बातचीत के जरिए संकट को टालने की कोशिश की गई, लेकिन अंदर से फायरिंग के बाद पुलिस को बलपूर्वक प्रवेश करना पड़ा। करीब आठ घंटे तक चले इस पूरे घटनाक्रम का अंत अरविंद की मौत और उसके बेटे की जान जाने के साथ हुआ, जबकि उसकी दो बेटियों को सुरक्षित बचा लिया गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share