
‘भारत मंडपम’ विरोध पर 270 से ज्यादा पूर्व जजों और नौकरशाहों ने लिखा संयुक्त पत्र,
नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit 2026 के दौरान ‘भारत मंडपम’ में Bharat Mandapam protest, Indian Youth Congress के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया शर्टलेस विरोध प्रदर्शन अब राजनीतिक और सामाजिक टिप्पणी का विषय बन गया है। इसी बीच joint letter, ex-judges and bureaucrats के रूप में 270 से अधिक पूर्व न्यायाधीशों और सेवानिवृत्त नौकरशाहों ने एक संयुक्त पत्र जारी कर इस प्रदर्शन की कड़ी condemnation की है।
पत्र में कहा गया है कि यह विरोध-प्रदर्शन “भारत की वैश्विक छवि को नुकसान” पहुँचाने वाला था और इस तरह के कदमों से न सिर्फ आयोजन की गरिमा पर चोट पहुँचती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों में देश की प्रतिष्ठा भी प्रभावित होती है। पूर्व दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एस. एन. ढिंगरा और पूर्व पुलिस महानिदेशक बी. एल. वोहरा जैसे वरिष्ठ हस्तियों ने इस आलोचना में अपनी सहमति जताई है।
पत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि democratic protest लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक अधिकार है, परंतु वह “अराजकता या राष्ट्रीय अपमान” तक विस्तारित नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, असहमति और विरोध को “बौद्धिक दृढ़ता और संसदीय बहस” के माध्यम से व्यक्त किया जाना चाहिए बजाय इसके कि किसी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम को मंच बनाकर देश की छवि के साथ खिलवाड़ किया जाए।
पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि इस तरह के प्रदर्शन से निवेशकों और वैश्विक समुदाय का भरोसा भी कम हो सकता है, खासकर तब जब कार्यक्रम का उद्देश्य भारत की तकनीकी प्रगति और वैश्विक नेतृत्व को उजागर करना था। पूर्व जजों और अधिकारीयों ने इसे “राष्ट्रीय कलंक” बताया है और सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे ऐसे मंचों का सम्मान करें।
यह मामला उस विवाद के बीच आया है जिसमें युवा कांग्रेस के कई प्रदर्शनकारियों को AI Impact Summit protest के सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने भी गिरफ्तार किया है और इस पर राजनीतिक प्रतिक्रिया जारी है।



