
बिहार में सत्ता परिवर्तन
बिहार की राजनीति में चौदह अप्रैल दो हजार छब्बीस को बड़ा बदलाव देखने को मिला जब लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया उनके इस फैसले के साथ ही राज्य में एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत हो गई उन्होंने पटना में राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपने से पहले कैबिनेट की अंतिम बैठक की अध्यक्षता की और सरकार को भंग करने की सिफारिश भी की इस घटनाक्रम ने साफ संकेत दे दिया था कि बिहार में नेतृत्व परिवर्तन तय है बताया जा रहा है कि हाल ही में राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया जिससे उनके सक्रिय प्रशासनिक भूमिका से हटने के संकेत पहले ही मिल गए थे
नीतीश कुमार के इस्तीफे के तुरंत बाद एनडीए के भीतर हलचल तेज हो गई और भाजपा विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को नेता चुना गया जिससे उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है सम्राट चौधरी बिहार की राजनीति में एक मजबूत ओबीसी चेहरा माने जाते हैं और उपमुख्यमंत्री के रूप में भी काम कर चुके हैं उनके नेतृत्व में बनने वाली सरकार को राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है माना जा रहा है कि जल्द ही नई सरकार का शपथ ग्रहण होगा जिसमें एनडीए के सभी सहयोगी दल शामिल रहेंगे
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर काफी लंबा और प्रभावशाली रहा है उन्होंने दो हजार पांच से लेकर दो हजार छब्बीस तक कई बार मुख्यमंत्री पद संभाला और कुल मिलाकर करीब बीस वर्षों तक बिहार की सत्ता में रहे उनके कार्यकाल में कानून व्यवस्था सड़क निर्माण शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हालांकि उनके बार बार गठबंधन बदलने के फैसलों को लेकर उन्हें आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा इस्तीफा देने के बाद उन्होंने कहा कि वे नई सरकार को पूरा सहयोग देंगे और बिहार के विकास में अपना योगदान जारी रखेंगे
इस पूरे घटनाक्रम को बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है भाजपा के नेतृत्व में बनने वाली सरकार राज्य की नीतियों और राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दे सकती है राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसका असर आने वाले चुनावों और सामाजिक समीकरणों पर भी पड़ेगा खासकर पिछड़े वर्ग की राजनीति पर अब सबकी नजरें नई सरकार के गठन और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार के भविष्य पर टिकी हुई हैं



