
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और ऊर्जा संकट के माहौल में अब दुनिया की नजर चीन की गोल्ड खरीद रणनीति पर टिक गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के बीच चीन बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहा है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में नई चिंता पैदा हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन डॉलर पर निर्भरता कम करने और अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित करने के लिए गोल्ड रिजर्व तेजी से बढ़ा रहा है।
दरअसल, अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण कच्चे तेल की सप्लाई और वैश्विक व्यापार पर दबाव बढ़ा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव की वजह से तेल बाजार में अस्थिरता देखने को मिल रही है, जिसका असर सोने की कीमतों पर भी पड़ रहा है। ऐसे समय में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर गोल्ड की ओर रुख कर रहे हैं। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि चीन लगातार अपने केंद्रीय बैंक के जरिए सोना खरीद रहा है ताकि किसी बड़े आर्थिक संकट की स्थिति में उसकी अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहे।
विशेषज्ञों के अनुसार चीन की यह रणनीति केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ी भू-राजनीतिक तैयारी भी मानी जा रही है। अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ बढ़ती आर्थिक प्रतिस्पर्धा के बीच चीन डॉलर सिस्टम के विकल्प तैयार करने में जुटा है। इसी वजह से वह सोने को अपने रिजर्व का अहम हिस्सा बना रहा है। दूसरी ओर, भारत समेत कई एशियाई देशों में भी गोल्ड की मांग बढ़ती दिखाई दे रही है।
वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। कुछ समय पहले सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था, लेकिन बाद में मुनाफावसूली और डॉलर की मजबूती के कारण कीमतों में गिरावट भी देखने को मिली। इसके बावजूद निवेशकों का भरोसा सोने पर बना हुआ है क्योंकि युद्ध, महंगाई और आर्थिक संकट के दौर में इसे सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है।
भारत में भी सोने की बढ़ती कीमतों और आयात बिल को लेकर चिंता बढ़ी है। हाल ही में प्रधानमंत्री ने लोगों से अनावश्यक गोल्ड खरीदारी टालने और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत का गोल्ड आयात बिल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, जिससे व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ रहा है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि आने वाले महीनों में यदि अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ता है या तेल संकट गहराता है, तो सोने की कीमतों में फिर बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं चीन की लगातार खरीदारी अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मार्केट में मांग को और मजबूत कर सकती है। इससे दुनियाभर के निवेशकों की रणनीति पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।


