
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बार फिर कूटनीतिक बातचीत की कोशिश तेज हुई है। इसी बीच अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से खबर सामने आई कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को प्रतिबंधों में राहत और उसके फ्रीज किए गए कुछ फंड तक पहुंच देने पर विचार कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए तेहरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर ठोस कदम उठाने होंगे। हालांकि, ट्रंप ने बाद में इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान को कुछ भी ऑफर नहीं किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच सीधे नहीं बल्कि मध्यस्थों के जरिए बातचीत चल रही है। कतर और पाकिस्तान इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने बातचीत को सकारात्मक और रचनात्मक बताया है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि किसी समझौते के लिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों का समाधान जरूरी होगा।
अमेरिकी पक्ष की कथित पेशकश में ईरान पर लगे कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों तक पहुंच का मुद्दा शामिल है। इसके बदले अमेरिका ईरान से परमाणु गतिविधियों को लेकर ठोस प्रतिबद्धताएं चाहता है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच इस बात पर अभी सहमति नहीं बनी है कि कौन-सा कदम पहले उठाया जाएगा और परमाणु मुद्दे पर प्रतिबद्धताओं को किस समय लागू किया जाएगा।
हालांकि, इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इसका खंडन किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने ईरान को कोई प्रतिबंध राहत या फ्रीज फंड जारी करने की पेशकश नहीं की है और रिपोर्ट को गलत बताया। इस तरह अमेरिकी प्रशासन की ओर से बातचीत की खबर और राष्ट्रपति के सार्वजनिक बयान के बीच अंतर सामने आया है।
ईरान की ओर से भी परमाणु मुद्दे पर लचीले रुख की खबरों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि तेहरान परमाणु मुद्दे पर बातचीत में लचीलापन दिखा रहा है, जबकि ईरानी पक्ष से जुड़े एक अधिकारी ने ऐसी खबरों को खारिज किया है। ईरान का जोर बातचीत में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और अमेरिकी नाकाबंदी से जुड़े मुद्दों पर रहा है, जबकि अमेरिका परमाणु कार्यक्रम को समझौते का प्रमुख हिस्सा बनाना चाहता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस पूरे विवाद का एक अहम हिस्सा बना हुआ है। ईरान ने इस समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने से जुड़े प्रस्तावों को प्रतिबंधों और अमेरिकी नाकाबंदी हटाने जैसी शर्तों से जोड़ा है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए इसके आसपास जारी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ा है।
ईरान की ओर से हाल में सात दिन के प्रस्ताव से जुड़ी बातचीत भी सामने आई थी, जिसमें संघर्ष रोकने, अमेरिकी नाकाबंदी हटाने, तेल पर प्रतिबंधों में राहत और फ्रीज संपत्तियों को जारी करने जैसे मुद्दे शामिल थे। इसके बदले ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री यातायात बहाल करने और परमाणु कार्यक्रम पर आगे बातचीत की बात कही थी। ट्रंप ने इस प्रस्ताव को पहले खारिज किया था, लेकिन इसके बावजूद अमेरिका की ओर से आगे बातचीत की संभावना के संकेत दिए गए।
मध्यस्थों की कोशिशों के बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत से जुड़े संपर्कों में भाग लिया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि वह अमेरिकी जवाब का इंतजार कर रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि बातचीत में परमाणु मुद्दे पर ठोस प्रगति के बिना किसी अंतिम समझौते तक पहुंचना संभव नहीं होगा।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान को प्रतिबंधों में राहत और फ्रीज संपत्तियों तक पहुंच देने की खबर अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई है, लेकिन ट्रंप स्वयं इस तरह की पेशकश से इनकार कर चुके हैं। इसलिए इसे फिलहाल संभावित बातचीत के एक प्रस्ताव या विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है, न कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए किसी अंतिम समझौते के रूप में। आगे की बातचीत में परमाणु गतिविधियों, प्रतिबंधों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्षों का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।



