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हम्पी गैंगरेप-मर्डर केस

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कर्नाटक के गंगावती जिला एवं सत्र न्यायालय ने एक अत्यंत गंभीर और शर्मनाक अपराध में तीन आरोपियों को मौत की सजा सुनाई है, जो 2025 में हम्पी के पास हुई एक जघन्य घटना से जुड़ा है जिसमें एक इजरायली महिला पर्यटक और एक भारतीय होमस्टे ऑपरेटर के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ तथा एक पुरुष पर्यटक की हत्या भी कर दी गई थी। इस फैसले को अदालत ने “रेयर ऑफ द रेयर” यानी दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में रखा, इसलिए अत्यधिक सजा देना उचित ठहराया गया।

यह भयावह घटना 6 मार्च 2025 की रात की है, जब हम्पी के पास सनापुर झील के किनारे तारे देखने निकले एक समूह में एक 27-साल की इजरायली महिला, एक 29-साल की होमस्टे मालकिन और तीन पुरुष साथी शामिल थे। तभी मोटरसाइकिल पर आए तीन स्थानीय हमलावरों ने पहले पेट्रोल पंप का रास्ता पूछा और फिर पैसों की मांग की। जब समूह ने पैसे देने से मना किया, तो मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया। आरोपियों ने समूह पर हमला किया, तीन पुरुषों को तंगभद्रा नदी के नहर में धक्का दिया, जिसमें से एक व्यक्ति डूब गया और उसकी बाद में मौत हो गई थी। इस बीच दो महिलाओं — इजरायली पर्यटक और होमस्टे मालिक — के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।

पुलिस ने घटना के बाद तेज़ कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उन पर बलात्कार, हत्या और अन्य संबंधित अपराधों का आरोप लगाया गया। 11 महीने की जांच और सुनवाई के बाद 6 फरवरी 2026 को अदालत ने तीनों — मल्लेश (उर्फ हैंडिमल्ला), साई और शरणप्पा — को दोषी ठहराया और 16 फरवरी 2026 को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस प्रकार की क्रूरताएँ सामान्य या साधारण अपराधों की श्रेणी में नहीं आतीं और समाज के सामूहिक विवेक को झकझोर देती हैं; अतः ऐसी स्थितियों में अधिकतम दंड देना आवश्यक है।

न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि इस घटना का प्रभाव सिर्फ स्थानीय या राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता का विषय बन गया, क्योंकि मामला एक विदेशी नागरिक के साथ दरिंदगी के रूप में सामने आया। इसने न केवल भारत में महिलाओं और पर्यटकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए, बल्कि इस तरह के अपराधों के खिलाफ कानूनी उपायों और दंडात्मक उपायों पर भी बहस को बढ़ाया।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में मौत की सजा केवल उन मामलों में सुनाई जाती है जिन्हें “रेयर ऑफ द रेयर” माना जाता है — यानी वे अपराध जिनकी प्रकृति इतनी भयावह, क्रूर और सामाजिक रूप से अस्वीकार्य होती है कि जीवन के सजा से न केवल न्याय की अनुभूति होती है बल्कि यह अन्य संभावित अपराधियों के लिए निवारक भी साक्ष्य प्रदान करती है। अदालत के फैसले के बाद न्यायव्यवस्था अब देखेगी कि कर्नाटक हाईकोर्ट इस फैसले की समीक्षा के दौरान इसे बरकरार रखता है या कोई बदलाव करता है।

इस घटना ने देश भर में महिलाओं के प्रति अपराधों, पर्यटकों की सुरक्षा, तथा भारत में दुष्कर्म और हिंसा के मामलों पर प्रतिक्रिया और दंड की प्रक्रिया जैसी संवेदनशील सामाजिक चुनौतियों पर एक व्यापक बहस शुरू कर दी है। लोगों और पीड़ितों के परिवारों ने न्याय के इस कठिन निर्णय का स्वागत किया है और कहा है कि ऐसे कठोर फैसले समाज में महिलाओं के प्रति हिंसा को कम करने में मदद करेंगे।

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