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नेतन्याहू ने ट्रंप की गाजा शांति योजना ठुकराई

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गाजा में लंबे समय से जारी संघर्ष को खत्म करने की अमेरिकी कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका की ओर से प्रस्तावित 15 सूत्रीय शांति योजना को खारिज कर दिया है। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इजरायली सेना गाजा से तब तक पीछे नहीं हटेगी, जब तक हमास को पूरी तरह निःशस्त्र नहीं कर दिया जाता। उन्होंने कहा कि इजरायल किसी ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगा जिसमें हमास के पास हथियार या सैन्य क्षमता बनी रहे।

नेतन्याहू ने कैबिनेट बैठक की शुरुआत में अमेरिकी प्रस्ताव पर इजरायल का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि 15 सूत्रीय दस्तावेज को इजरायल स्वीकार नहीं करता। उनके मुताबिक, इजरायल डिफेंस फोर्सेज यानी IDF गाजा से किसी भी तरह की वापसी तब तक नहीं करेगी, जब तक हमास का वास्तविक रूप से निरस्त्रीकरण नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल अपनी सेना और नागरिकों के खिलाफ संभावित खतरों को रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा।

नेतन्याहू ने हमास के निरस्त्रीकरण की अपनी शर्त को काफी सख्त बताते हुए कहा कि इसका मतलब केवल कुछ हथियारों को जमा कराना नहीं है। उनके अनुसार भारी हथियारों से लेकर हल्के हथियारों तक सभी हथियारों को खत्म करना होगा और निरस्त्रीकरण वास्तविक होना चाहिए। इजरायली प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि केवल कागजी या दिखावटी निरस्त्रीकरण को इजरायल स्वीकार नहीं करेगा।

अमेरिकी योजना का उद्देश्य गाजा में संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक चरणबद्ध व्यवस्था तैयार करना है। प्रस्ताव में हमास के हथियार छोड़ने और उसके बाद इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी की बात शामिल है। योजना में गाजा की सुरक्षा और प्रशासन के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था तथा नई फिलिस्तीनी पुलिस बल की भूमिका का भी प्रस्ताव है। हालांकि, इजरायल और हमास के बीच योजना को लागू करने की प्राथमिक शर्तों को लेकर अभी भी गंभीर मतभेद बने हुए हैं।

मामले में सबसे बड़ी अड़चन यह है कि इजरायल और हमास निरस्त्रीकरण तथा सेना की वापसी का क्रम अलग-अलग चाहते हैं। नेतन्याहू का कहना है कि पहले हमास को पूरी तरह हथियार छोड़ने होंगे और उसके बाद ही इजरायली सेना की वापसी संभव होगी। दूसरी ओर, हमास की ओर से यह रुख सामने आया है कि इजरायली हमले रुकने और सेना के पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही वह हथियारों से जुड़ी व्यवस्था पर आगे बढ़ सकता है। इस अलग-अलग रुख ने अमेरिकी मध्यस्थता के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

इस घटनाक्रम के बीच नेतन्याहू ने फिलिस्तीनी राज्य के गठन को लेकर भी अपना सख्त रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि जब तक वह इजरायल के प्रधानमंत्री हैं, तब तक गाजा या वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना नहीं की जाएगी। उनका यह बयान अमेरिकी शांति प्रयासों के लिए एक और महत्वपूर्ण चुनौती माना जा रहा है, क्योंकि गाजा के भविष्य और फिलिस्तीनी शासन की व्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रस्ताव सामने आते रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से इस योजना को लेकर पहले बातचीत में प्रगति का संकेत दिया गया था। लेकिन नेतन्याहू के ताजा बयान से स्पष्ट हो गया है कि इजरायली नेतृत्व अमेरिकी प्रस्ताव के सभी हिस्सों से सहमत नहीं है। नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल अमेरिका के साथ इस मुद्दे पर बातचीत कर रहा है और प्रस्ताव में कुछ बातें ऐसी हैं जिन्हें वह स्वीकार कर सकता है, जबकि कुछ अन्य बिंदुओं पर उसकी असहमति है।

गाजा में जारी मानवीय संकट के बीच इस असहमति ने युद्ध समाप्त करने की कोशिशों को और जटिल बना दिया है। इजरायली सेना की मौजूदगी, हमास के हथियारों का मुद्दा, गाजा के भविष्य के प्रशासन और फिलिस्तीनी राज्य की संभावना जैसे सवाल किसी भी शांति समझौते के लिए सबसे बड़ी बाधाओं में शामिल हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका और इजरायल के बीच होने वाली बातचीत तथा हमास की प्रतिक्रिया पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। फिलहाल नेतन्याहू के बयान से इतना साफ है कि इजरायल हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण की अपनी शर्त से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है और इसके बिना गाजा से सेना वापस लेने को स्वीकार नहीं कर रहा है।

 

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