Advertisement
झारखंडलाइव अपडेट
Trending

झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर आंदोलन तेज

Advertisement
Advertisement

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। रांची में लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों और राज्य सरकार के बीच शुक्रवार को बातचीत की प्रक्रिया शुरू हुई। आंदोलनकारी छात्र JPSC और JSSC से जुड़ी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं। इसी बीच सरकार और छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत की पहल को विवाद का समाधान निकालने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों का आंदोलन 14वें दिन में प्रवेश कर चुका है और इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारी लगातार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे हुए हैं। आंदोलन का नेतृत्व JPSC-JSSC Reforms Manch से जुड़े अभ्यर्थी कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले हजारों युवाओं का भविष्य परीक्षा प्रक्रिया की अनिश्चितता और कथित गड़बड़ियों से प्रभावित हो रहा है। ऐसे में केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि भर्ती परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था में ठोस और समयबद्ध सुधार किया जाना जरूरी है।

बातचीत के लिए छात्रों की ओर से प्रतिनिधिमंडल तैयार किया गया है, जबकि राज्य सरकार की तरफ से भी मंत्रियों और अधिकारियों का दल चर्चा में शामिल होने पहुंचा। रांची के गेस्ट हाउस में दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के पहुंचने के बाद बातचीत शुरू होने की स्थिति बनी। आंदोलनकारियों की कोशिश है कि उनकी प्रमुख मांगों को सरकार के सामने सीधे रखा जाए और प्रत्येक मुद्दे पर स्पष्ट जवाब लिया जाए। छात्रों का कहना है कि वे बातचीत के जरिए समाधान चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सरकार को उनकी शिकायतों पर गंभीरता से विचार करना होगा।

इस पूरे विवाद की जड़ सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों के बीच पैदा हुआ अविश्वास है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि पिछले कुछ समय में परीक्षाओं से संबंधित कथित पेपर लीक, अनियमितताओं, परीक्षा स्थगित होने और परिणामों में देरी जैसी घटनाओं ने उनकी मुश्किलें बढ़ाई हैं। JPSC से जुड़ी कथित भर्ती गड़बड़ी की जांच भी चल चुकी है और इस मामले में गिरफ्तारियां होने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे माहौल में छात्रों की मांग केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वे पूरी भर्ती व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की मांग कर रहे हैं।

आंदोलन के दौरान छात्रों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि सरकारी नौकरी की तैयारी में युवाओं के कई वर्ष निकल जाते हैं। अभ्यर्थी लंबे समय तक पढ़ाई, कोचिंग और परीक्षा की तैयारी में समय और पैसा लगाते हैं। यदि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आती है या परीक्षा बार-बार प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर उम्मीदवारों के करियर पर पड़ता है। छात्रों का तर्क है कि परीक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की अनियमितता केवल एक परीक्षा को प्रभावित नहीं करती, बल्कि हजारों परिवारों की उम्मीदों और युवाओं के भविष्य को प्रभावित करती है।

इसी कारण आंदोलनकारी भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। छात्रों का जोर इस बात पर है कि परीक्षा कराने वाली संस्थाओं की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाई जाए, शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार साबित होता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही अभ्यर्थी चाहते हैं कि आने वाली परीक्षाओं का कैलेंडर स्पष्ट हो और परीक्षा, परिणाम तथा नियुक्ति की प्रक्रिया तय समयसीमा के भीतर पूरी की जाए।

आंदोलन के बीच भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की तबीयत को लेकर भी चिंता बढ़ी है। रिपोर्टों के मुताबिक आंदोलन के दौरान एक प्रदर्शनकारी की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बावजूद छात्रों का आंदोलन जारी रहा। लगातार भूख हड़ताल से स्वास्थ्य संबंधी खतरे को देखते हुए सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत का महत्व और बढ़ जाता है।

वहीं, आंदोलन के दौरान राजनीतिक गतिविधियां भी देखने को मिली हैं। विभिन्न छात्र संगठनों ने प्रदर्शन को समर्थन दिया है। शुक्रवार को AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा भी रांची में चल रहे आंदोलन में शामिल हुईं। इसी दौरान उनके ऊपर स्याही फेंके जाने की घटना भी सामने आई, जिसने आंदोलन के माहौल को और गरमा दिया। इस घटना के बाद प्रदर्शन की सुरक्षा और विरोध के दौरान राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हुई।

हालांकि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत शुरू होना इस आंदोलन के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, लेकिन असली परीक्षा बातचीत के नतीजे पर होगी। यदि सरकार छात्रों की प्रमुख मांगों पर स्पष्ट समयसीमा और कार्रवाई का भरोसा देती है तो आंदोलन को समाप्त करने की राह खुल सकती है। दूसरी ओर यदि बातचीत केवल आश्वासन तक सीमित रहती है और छात्रों को उनकी मांगों पर ठोस जवाब नहीं मिलता, तो आंदोलन आगे भी जारी रहने की संभावना बनी रहेगी।

झारखंड का यह आंदोलन राज्य में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता के लिए भी महत्वपूर्ण है। सरकारी नौकरी के लिए होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता केवल उम्मीदवारों का अधिकार नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती केवल मौजूदा आंदोलन को शांत करने की नहीं, बल्कि युवाओं के बीच भर्ती व्यवस्था को लेकर भरोसा दोबारा कायम करने की भी है। आने वाले दिनों में सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत से यह तय होगा कि वर्षों से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को कोई ठोस समाधान मिलता है या आंदोलन का अगला चरण शुरू होता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share