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झारखंड में छात्रों का आंदोलन तेज

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झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठे विवाद ने अब राज्य की राजनीति और सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्र और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थी लगातार कई दिनों से रांची में प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के 22वें दिन, 15 अगस्त को हजारों छात्रों ने रांची में तिरंगा यात्रा निकाली और इसके साथ ही आंदोलन के अगले चरण का ऐलान कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 20 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास का घेराव किया जाएगा और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की जाएगी।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर निकाली गई तिरंगा यात्रा रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू हुई, जहां लंबे समय से छात्र और अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं। यह यात्रा अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंची। प्रदर्शन में हजारों युवाओं ने राष्ट्रीय ध्वज के साथ हिस्सा लिया और भारत माता की जय तथा वंदे मातरम जैसे नारे लगाए। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका संघर्ष केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड की पूरी भर्ती व्यवस्था की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा है।

JSSC-JPSC रिफॉर्म मंच से जुड़े छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि भर्ती परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार गंभीरता से कार्रवाई नहीं कर रही है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में संदिग्ध परीक्षाओं को रद्द करना, पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है। छात्र चाहते हैं कि मामले की जांच CBI या झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति से कराई जाए। आंदोलनकारी कुछ JSSC-CGL और JPSC परीक्षाओं को रद्द करने की भी मांग कर रहे हैं।

आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ-साथ कांग्रेस पर भी राजनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश की है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि राज्य सरकार उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं करती है तो कांग्रेस को झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस लेने पर विचार करना चाहिए। छात्रों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि युवाओं और छात्रों के मुद्दों पर समर्थन के बावजूद उनकी मांगों को लेकर ठोस कदम नहीं उठाया गया।

प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन को और व्यापक बनाने की रणनीति भी बनाई है। घोषणा के अनुसार, रविवार को झारखंड के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राहुल गांधी के पुतले जलाए जाने की बात कही गई। इसके बाद 20 अगस्त को बड़ी संख्या में युवाओं और अभ्यर्थियों से रांची पहुंचकर मुख्यमंत्री आवास के घेराव में शामिल होने की अपील की गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।

इस आंदोलन में कुछ प्रदर्शनकारियों की तबीयत बिगड़ने का मुद्दा भी सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, दो प्रदर्शनकारी व्हीलचेयर पर रहते हुए भी तिरंगा यात्रा में शामिल हुए। वहीं JLKM नेता देवेंद्र मांझी के लंबे समय से अनशन पर रहने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मार्च में शामिल होने से रोकने के लिए अस्पताल से बाहर नहीं निकलने दिया गया, जिसके बाद इस मुद्दे को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया।

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर यह आंदोलन पहले भी उग्र रूप ले चुका है। 10 अगस्त को हजारों युवा झारखंड विधानसभा की ओर बढ़े थे, जिसके दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया था और बाद में बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाने की खबरें सामने आईं। इसके बावजूद छात्र आंदोलन से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और अब मुख्यमंत्री आवास के घेराव का ऐलान कर आंदोलन को अगले स्तर पर ले जाया जा रहा है।

हालांकि इस पूरे मामले पर हेमंत सोरेन सरकार ने छात्रों की चिंताओं को दूर करने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। सरकार की ओर से वार्षिक परीक्षा कैलेंडर, तकनीक आधारित सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था, उत्तर कुंजी और OMR शीट समय पर जारी करने तथा भर्ती प्रक्रिया में जवाबदेही तय करने जैसे सुधारों की बात कही गई है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पेपर लीक केवल झारखंड की नहीं, बल्कि देश के सामने एक व्यापक चुनौती है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर की जाएगी।

इस बीच सरकार ने छात्रों के दबाव के बाद कुछ महत्वपूर्ण कदम भी उठाए हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की घोषणा की थी और अन्य विवादित परीक्षाओं को लेकर भी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। इसके बावजूद आंदोलनकारी व्यापक जांच और भर्ती व्यवस्था में स्थायी सुधार की मांग पर कायम हैं।

कुल मिलाकर, JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब हेमंत सोरेन सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है। एक तरफ सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिला रही है, वहीं दूसरी तरफ आंदोलनकारी 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत होती है या प्रदर्शन और व्यापक होता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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