देशभर में NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और TVK प्रमुख C. Joseph Vijay ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि NEET व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हुई है और अब इस परीक्षा को समाप्त कर राज्यों को अपने स्तर पर मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया तय करने का अधिकार मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि तमिलनाडु लंबे समय से NEET का विरोध करता रहा है क्योंकि यह परीक्षा ग्रामीण क्षेत्रों, सरकारी स्कूलों और क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ने वाले छात्रों के साथ न्याय नहीं करती। उनका कहना है कि इस परीक्षा ने शिक्षा व्यवस्था में असमानता बढ़ाई है और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए मेडिकल शिक्षा तक पहुंच मुश्किल बना दी है। विजय ने मांग की कि MBBS और अन्य मेडिकल कोर्सों में दाखिला 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर दिया जाए ताकि राज्यों को अपने छात्रों के हितों के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिल सके।
दरअसल, NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी, लेकिन बाद में पेपर लीक और “गेस पेपर” विवाद सामने आने के बाद केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द कर दी। जांच में यह दावा किया गया कि कई प्रश्न पहले से लीक हुए पेपर से मेल खाते थे। इसके बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी नाराजगी देखने को मिली। देशभर में प्रदर्शन शुरू हो गए और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई।
केंद्र सरकार ने मामले की जांच Central Bureau of Investigation को सौंप दी है। जांच एजेंसी ने अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और देशभर में छापेमारी कर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस व अहम दस्तावेज जब्त किए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में राजस्थान, महाराष्ट्र और हरियाणा से जुड़े कई संदिग्धों की भूमिका सामने आई है।
विजय ने अपने बयान में कहा कि यह पहली बार नहीं है जब NEET की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने में असफल रही है। उनका कहना है कि लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है और बार-बार होने वाली गड़बड़ियां छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल रही हैं।
तमिलनाडु में NEET को लेकर पहले भी बड़ा राजनीतिक विवाद रहा है। राज्य की कई सरकारें इस परीक्षा के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं। राज्य सरकारों का तर्क है कि केंद्रीय परीक्षा प्रणाली राज्य बोर्ड के छात्रों को नुकसान पहुंचाती है, जबकि कोचिंग आधारित शिक्षा को बढ़ावा देती है। अब मुख्यमंत्री विजय के इस बयान के बाद एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर NEET को लेकर बहस तेज हो गई है।
वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों ने भी मोदी सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। कई नेताओं ने इसे शिक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता बताते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है। छात्रों और अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता अब री-एग्जाम की तारीख और एडमिशन प्रक्रिया को लेकर बनी हुई है। NTA ने कहा है कि नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित की जाएगी और छात्रों का पंजीकरण वैध रहेगा।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद ने भारत की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। लगातार पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटनाओं ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। ऐसे में आने वाले समय में परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल मॉनिटरिंग और एडमिशन सिस्टम में बड़े सुधारों की मांग और तेज हो सकती है।



