Advertisement
भारतलाइव अपडेट
Trending

पेट्रोल-डीजल खरीदने के नियम बदले, सरकार का बड़ा फैसला

Advertisement
Advertisement

सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति और परिवहन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे हालात में केंद्र सरकार नहीं चाहती कि देश के खुदरा पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कमी जैसी स्थिति उत्पन्न हो। इसलिए बड़े पैमाने पर ईंधन खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए अलग व्यवस्था लागू की गई है।

नए नियमों के तहत उद्योग, फैक्ट्रियां, बड़े परिवहन ऑपरेटर, निर्माण कंपनियां, खनन क्षेत्र, बड़े संस्थान और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ता अब सीधे रिटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन नहीं खरीद सकेंगे। उन्हें अपनी आवश्यकता के अनुसार बल्क सप्लाई चैनल के माध्यम से ही पेट्रोल और डीजल लेना होगा। सरकार का मानना है कि पिछले कुछ समय से खुदरा और बल्क कीमतों में अंतर होने के कारण कई बड़े उपभोक्ता सस्ता ईंधन पाने के लिए रिटेल पंपों का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे कई क्षेत्रों में आम ग्राहकों के लिए ईंधन उपलब्धता प्रभावित होने लगी थी।

सरकार ने डीजल की खुदरा बिक्री को लेकर भी अतिरिक्त प्रतिबंध लगाया है। नए निर्देशों के अनुसार किसी भी ग्राहक या वाहन को एक दिन में 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं बेचा जाएगा। साथ ही खरीदे गए ईंधन को आगे बेचने पर भी रोक रहेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य जमाखोरी रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि ईंधन केवल वास्तविक आवश्यकता के लिए ही खरीदा जाए।

विशेषज्ञों के अनुसार इस फैसले की सबसे बड़ी वजह रिटेल और बल्क डीजल की कीमतों के बीच बढ़ता अंतर है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बल्क उपभोक्ताओं को मिलने वाला डीजल खुदरा कीमत की तुलना में लगभग 40 रुपये प्रति लीटर तक महंगा पड़ रहा था। यही कारण था कि कई बड़े उपभोक्ता बल्क सप्लाई छोड़कर सामान्य पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदने लगे थे। इससे सरकारी पेट्रोल पंपों पर अचानक मांग बढ़ गई और कई स्थानों पर आपूर्ति पर दबाव देखने को मिला।

इस निर्णय का असर विभिन्न उद्योगों, ट्रांसपोर्ट कंपनियों और बड़े संस्थानों की लागत पर भी पड़ सकता है। अब उन्हें अधिकृत बल्क सप्लाई के जरिए ईंधन खरीदना होगा, जिससे उनकी परिचालन लागत बढ़ सकती है। हालांकि सरकार का कहना है कि आम उपभोक्ताओं के हित सर्वोपरि हैं और यह कदम सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और सामान्य उपभोक्ताओं के लिए किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी। यह निर्णय केवल बड़े व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए लागू किया गया है। सरकार लगातार ईंधन आपूर्ति की समीक्षा कर रही है और यदि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार होता है तो इन प्रतिबंधों पर पुनर्विचार भी किया जा सकता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता जारी रह सकती है। ऐसे में भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए ईंधन की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से सरकार ने यह अस्थायी कदम उठाया है, जिसकी अवधि फिलहाल 90 दिन तय की गई है। इसके बाद परिस्थितियों की समीक्षा कर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

विश्लेषकों का कहना है कि इस फैसले का आम वाहन चालकों पर तत्काल कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके उलट यदि बड़े उपभोक्ता रिटेल पंपों से ईंधन नहीं खरीदेंगे, तो सामान्य ग्राहकों के लिए पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बेहतर बनी रहेगी। हालांकि उद्योग जगत इस फैसले से होने वाले अतिरिक्त खर्च और लॉजिस्टिक बदलाव को लेकर सरकार से आगे भी चर्चा कर सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस नई व्यवस्था का देश की ईंधन आपूर्ति और बाजार पर कितना प्रभाव पड़ता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share