Advertisement
राजनीतिलाइव अपडेट
Trending

पीएम मोदी और पीयूष गोयल के कथित डीपफेक वीडियो पर महाराष्ट्र साइबर की बड़ी कार्रवाई

Advertisement
Advertisement

सोशल मीडिया पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से तैयार किए गए कथित डीपफेक और मॉर्फ्ड वीडियो के बढ़ते मामलों के बीच महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से जुड़े कथित फर्जी वीडियो और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को लेकर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है और उन सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान की जा रही है, जिनके माध्यम से यह सामग्री साझा की गई थी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन वीडियो और तस्वीरों को किस तकनीक से तैयार किया गया और सबसे पहले इन्हें किसने प्रसारित किया।

जानकारी के अनुसार, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का एक वीडियो इस तरह से संपादित या AI तकनीक के जरिए बदला गया, जिससे ऐसा प्रतीत हो कि उन्होंने ऐसे बयान दिए हैं जो उन्होंने वास्तव में नहीं दिए थे। शिकायतकर्ता का दावा है कि मूल वीडियो और वायरल वीडियो की तुलना करने पर स्पष्ट अंतर सामने आया, जिससे यह संदेह पैदा हुआ कि वीडियो को डिजिटल रूप से मॉर्फ या डीपफेक तकनीक की सहायता से तैयार किया गया है। इसी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी कथित रूप से आपत्तिजनक मॉर्फ्ड तस्वीरें और पोस्ट साझा किए जाने की शिकायत दर्ज कराई गई।

महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसियों ने संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने, संदिग्ध अकाउंट्स की जानकारी उपलब्ध कराने और मूल अपलोडर की पहचान करने का अनुरोध भी किया है। साथ ही डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाया जाएगा कि वीडियो और तस्वीरों में किस प्रकार की AI या एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया।

हाल के वर्षों में डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग तेजी से बढ़ा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या वीडियो को इस तरह बदला जा सकता है कि वह वास्तविक प्रतीत हो। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी सामग्री का इस्तेमाल गलत सूचना फैलाने, किसी व्यक्ति की छवि खराब करने या सामाजिक और राजनीतिक भ्रम पैदा करने के लिए किया जा सकता है। इसी कारण सरकार और जांच एजेंसियां लगातार लोगों से अपील कर रही हैं कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो या तस्वीरों की सत्यता जांचे बिना उन्हें साझा न करें।

महाराष्ट्र साइबर पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी। यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी व्यक्ति या समूह ने जानबूझकर डीपफेक सामग्री तैयार कर उसे वायरल किया है, तो संबंधित कानूनों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले को डिजिटल सुरक्षा और सोशल मीडिया पर फर्जी सामग्री के खिलाफ चल रहे अभियान के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ उसके दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण और डिजिटल जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक हो गया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share