
बिहार की राजनीति में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का सरकारी आवास चर्चा के केंद्र में आ गया है। पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड के सरकारी बंगले को खाली करने के नोटिस के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और राज्य सरकार के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। अब इस मामले को लेकर आरजेडी कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी में दिखाई दे रही है। पार्टी नेताओं ने संकेत दिए हैं कि यदि जरूरत पड़ी तो मामला हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जा सकता है। इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है और सत्ता पक्ष व विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
दरअसल, राबड़ी देवी को उनके लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे सरकारी आवास को खाली करने के लिए प्रशासन की ओर से नोटिस भेजा गया है। इस नोटिस के बाद आरजेडी ने इसे केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कहा कि इस पूरे मामले पर संगठन गंभीरता से विचार कर रहा है और जरूरत पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि पार्टी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट तक जाने से पीछे नहीं हटेगी।
इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब आरजेडी नेताओं ने इसे सामाजिक और राजनीतिक सम्मान से जोड़ना शुरू कर दिया। पूर्व मंत्री शिव चंद्र राम ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण की बात करने वाली सरकार राबड़ी देवी जैसी वरिष्ठ महिला नेता के साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रही है। उन्होंने दावा किया कि इसी आवास से कई दलित और पिछड़े वर्ग के नेताओं ने राजनीति में अपनी पहचान बनाई और यह बंगला केवल एक सरकारी मकान नहीं बल्कि सामाजिक न्याय की राजनीति का प्रतीक रहा है। आरजेडी नेताओं का आरोप है कि सरकार जानबूझकर विपक्ष को निशाना बना रही है।
वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे पर आरजेडी को घेरने का मौका नहीं छोड़ा। भाजपा प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि सरकारी संपत्ति किसी की निजी जागीर नहीं होती और सत्ता में रहने का मतलब यह नहीं कि सरकारी संसाधनों पर स्थायी अधिकार मिल जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरजेडी नेतृत्व लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण सरकारी व्यवस्थाओं को अपनी निजी संपत्ति समझने लगा था। भाजपा नेताओं का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और सरकारी नियमों का पालन हर व्यक्ति को करना चाहिए, चाहे वह कितना भी बड़ा राजनीतिक नेता क्यों न हो।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक सरकारी आवास तक सीमित नहीं है, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों और बिहार की बदलती राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव का परिवार लंबे समय से इस आवास से जुड़ा रहा है, इसलिए इसे आरजेडी समर्थक प्रतीकात्मक महत्व के रूप में देख रहे हैं। यही वजह है कि नोटिस जारी होने के बाद मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
सूत्रों के अनुसार, यदि प्रशासन आवास खाली कराने की दिशा में आगे बढ़ता है तो आरजेडी अदालत में यह तर्क रख सकती है कि मामले में पर्याप्त कानूनी प्रक्रिया और परिस्थितियों का मूल्यांकन जरूरी है। वहीं दूसरी ओर सरकार अपने फैसले को नियमों और प्रशासनिक अधिकारों के आधार पर सही ठहरा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि राबड़ी देवी और आरजेडी आगे क्या कदम उठाते हैं। अगर मामला अदालत तक पहुंचता है तो यह सिर्फ एक आवास विवाद नहीं रहेगा, बल्कि बिहार की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच एक बड़ी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई का रूप ले सकता है।



