
ED की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ममता बनर्जी को लगाई फटकार—ड्यूटी के दौरान अधिकारियों की शक्ति खत्म नहीं होती
Supreme Court of India ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई में कथित बाधा को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को एक बार फिर कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि जब ED अधिकारी अपनी ड्यूटी निभा रहे होते हैं, तब उनकी शक्तियां खत्म नहीं हो जातीं और उन्हें काम करने से रोका नहीं जा सकता। यह टिप्पणी I-PAC रेड से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें ED ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार और पुलिस ने उनकी जांच में बाधा डाली।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी सवाल उठाया कि अगर केंद्र में किसी दूसरी पार्टी की सरकार हो और राज्य स्तर पर इसी तरह की कार्रवाई की जाए, तो क्या स्थिति होगी। कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए संकेत दिया कि जांच एजेंसियों के काम में हस्तक्षेप कानून के शासन के खिलाफ है। पहले भी अदालत इस मामले को “असामान्य स्थिति” बता चुकी है और कहा था कि ऐसी घटनाओं के लिए कोई ठोस समाधान होना चाहिए ताकि भविष्य में टकराव न हो।
दरअसल, मामला जनवरी 2026 में I-PAC कार्यालय पर ED की छापेमारी से जुड़ा है, जहां आरोप है कि कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं और जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई। ED का कहना है कि यह सीधा हस्तक्षेप था, जबकि राज्य सरकार ने इन आरोपों को राजनीतिक बताया है। इस विवाद ने केंद्र और राज्य के बीच अधिकारों की सीमा और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता को लेकर बड़ी बहस खड़ी कर दी है।
अब सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया है। आने वाले समय में अदालत का अंतिम फैसला यह तय करेगा कि जांच एजेंसियों के अधिकार और राज्यों की भूमिका के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा।



