
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: असाधारण हालात में ही हो सकता है पैलेट गन का इस्तेमाल
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा पैलेट गन का इस्तेमाल केवल बेहद असाधारण और दुर्लभ परिस्थितियों में ही किया जा सकता है। कोर्ट ने इस मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि घटना के दौरान तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के गोला-बारूद और हथियारों के उपयोग से संबंधित सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं और जरूरत पड़ने पर अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं। अदालत ने संकेत दिया कि यह जांचना आवश्यक है कि मौके पर बल प्रयोग परिस्थितियों के अनुरूप था या नहीं और स्थापित नियमों का पालन किया गया था।
यह मामला उस विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है जिसमें परीक्षा व्यवस्था और अन्य मुद्दों को लेकर बड़ी संख्या में छात्र और युवा दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबरें सामने आई थीं। विपक्षी दलों और कई छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और पैलेट गन का इस्तेमाल भी किया गया, जिससे कई लोगों को चोटें आईं। वहीं सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और हिंसक स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई थी।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद भी लगातार गहराता जा रहा है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया और पैलेट गन के इस्तेमाल जैसे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनके बयान के बाद संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली तथा इस मुद्दे पर कई बार हंगामे की स्थिति भी बनी।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का पक्ष है कि भीड़ नियंत्रण के दौरान मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन किया गया। उपलब्ध आधिकारिक समीक्षा में कहा गया है कि यदि किसी स्थिति में सुरक्षा बलों या सार्वजनिक संपत्ति पर गंभीर खतरा उत्पन्न होता है तो उपलब्ध नियमों के तहत आवश्यक बल का प्रयोग किया जा सकता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में जवाबदेही और रिकॉर्ड का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है ताकि बाद में तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जा सके और यह पता लगाया जा सके कि बल प्रयोग वास्तव में परिस्थितियों के अनुरूप था या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को भविष्य में भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने एक ओर सुरक्षा एजेंसियों को कानून के दायरे में कार्रवाई करने का अधिकार स्वीकार किया, वहीं दूसरी ओर यह भी स्पष्ट कर दिया कि ऐसे अधिकारों का उपयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में ही होना चाहिए। अब इस मामले में अदालत के समक्ष पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड और आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इससे यह तय होगा कि जंतर-मंतर की घटना में बल प्रयोग की वैधता और प्रक्रिया का आकलन किस प्रकार किया जाएगा।



