
उद्धव ठाकरे ने प्रशांत भूषण के ‘सत्ता परिवर्तन’ वाले बयान का किया समर्थ
शिवसेना (UBT) प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के ‘रेजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन संबंधी बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार लोगों के वोट देने और विरोध प्रदर्शन करने के अधिकारों को सीमित करती है, तो ऐसी व्यवस्था को बदलने की जरूरत है। दिल्ली में हालिया प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी ठाकरे ने सवाल उठाए।
उद्धव ठाकरे ने मुंबई में आयोजित अखिल भारतीय मराठी पत्रकार परिषद के कार्यक्रम में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर निशाना साधा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित कार्रवाई का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि युवाओं और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया। हालांकि, पुलिस कार्रवाई से जुड़े इन आरोपों पर संबंधित पक्षों के बयानों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
ठाकरे ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती पर सवाल उठाया। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में पूछा कि क्या राजधानी में हजारों पुलिसकर्मियों को डांडिया खेलने के लिए तैनात किया गया था। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दलों तथा सत्तारूढ़ पक्ष के बीच राजनीतिक विवाद तेज है।
इस विवाद के केंद्र में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण का बयान भी है। उन्होंने हाल ही में कहा था कि लोकतंत्र में सरकार बदलने की मांग करना नागरिकों का अधिकार है। भूषण के मुताबिक, उनका आंदोलन चुनावी लोकतंत्र की रक्षा और चुनाव प्रक्रिया को सही ढंग से संचालित कराने से जुड़ा है। उनके ‘रेजीम चेंज’ वाले बयान के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
यह विवाद कॉकroach जनता पार्टी (CJP) और अन्य समूहों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर किए गए प्रदर्शनों के बाद बढ़ा। दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाके में प्रस्तावित तिरंगा मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था। पुलिस ने निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने जैसे आरोपों के संबंध में मामले दर्ज किए। आयोजकों ने अपने प्रदर्शन को चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों के उठाने का प्रयास बताया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष के सत्ता परिवर्तन संबंधी बयानों पर आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव के जरिए सत्ता में आने की संभावना नहीं देख रहा, इसलिए सत्ता परिवर्तन की बात कर रहा है। दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार की नीतियों का विरोध करना और चुनाव के माध्यम से सरकार बदलने की मांग करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान देते हुए सवाल किया कि क्या देश में तिरंगा लेकर विरोध प्रदर्शन करना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है। वहीं, सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर मतभेद बने हुए हैं और दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ सामने आ रहे हैं।
उद्धव ठाकरे के बयान के बाद ‘रेजीम चेंज’ को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। इस विवाद में एक तरफ विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की रक्षा से जोड़ रहा है, तो दूसरी तरफ सत्तापक्ष इसे सरकार को हटाने की राजनीतिक कोशिश के रूप में देख रहा है। अब इस मुद्दे पर आगे की राजनीतिक प्रतिक्रिया और प्रदर्शन से जुड़े मामलों की कार्रवाई पर नजर रहेगी।


