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UPI पर MDR की वापसी की तैयारी?

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देश में डिजिटल भुगतान प्रणाली को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आ सकता है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में एक संशोधन विधेयक पेश किया है, जिसके बाद यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) दोबारा लागू किए जाने की संभावना बन गई है। हालांकि सरकार ने फिलहाल UPI लेनदेन पर किसी प्रकार का शुल्क लागू नहीं किया है, लेकिन नए विधायी संशोधन से सरकार को भविष्य में जरूरत के अनुसार MDR लागू करने का कानूनी अधिकार मिल सकता है। इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद बैंकिंग, फिनटेक कंपनियों और व्यापारिक संगठनों के बीच व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

वर्तमान व्यवस्था के तहत UPI और रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड के अधिकांश लेनदेन पर व्यापारियों से कोई MDR नहीं लिया जाता। वर्ष 2020 में सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इसे शून्य (Zero MDR) कर दिया था। इसके बाद देश में UPI का उपयोग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया और आज यह भारत का सबसे लोकप्रिय डिजिटल भुगतान माध्यम बन चुका है। लेकिन बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता लंबे समय से यह तर्क देते रहे हैं कि बिना किसी शुल्क के इतनी बड़ी डिजिटल भुगतान व्यवस्था को संचालित करना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। सर्वर, साइबर सुरक्षा, तकनीकी निवेश और नेटवर्क संचालन पर लगातार बढ़ते खर्च के कारण इस व्यवस्था के लिए एक टिकाऊ राजस्व मॉडल की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

लोकसभा में पेश संशोधन विधेयक का उद्देश्य तत्काल MDR लागू करना नहीं है, बल्कि उस कानूनी प्रावधान में बदलाव करना है जिसने सभी UPI लेनदेन पर शून्य MDR को अनिवार्य बना रखा था। यदि यह संशोधन कानून का रूप लेता है तो सरकार भविष्य में परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग श्रेणी के व्यापारियों पर सीमित MDR लागू करने का निर्णय ले सकेगी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार बड़े व्यापारियों और अधिक मूल्य वाले लेनदेन के लिए अलग शुल्क व्यवस्था पर विचार कर सकती है, जबकि छोटे व्यापारियों और सामान्य उपभोक्ताओं को राहत देने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि शुल्क संरचना को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि MDR दोबारा लागू किया जाता है तो इसका सीधा शुल्क ग्राहकों से नहीं बल्कि व्यापारियों से लिया जाएगा। हालांकि आशंका यह भी है कि कुछ व्यापारी इस अतिरिक्त लागत का बोझ वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में ग्राहकों पर डाल सकते हैं। दूसरी ओर, बैंक और फिनटेक कंपनियों का कहना है कि MDR से मिलने वाला राजस्व डिजिटल भुगतान नेटवर्क को और मजबूत बनाने, नई तकनीकों में निवेश करने तथा साइबर सुरक्षा को बेहतर करने में मदद करेगा। इससे लंबे समय में UPI इकोसिस्टम अधिक टिकाऊ और सक्षम बन सकेगा।

भारत में UPI ने पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति दी है। हर महीने अरबों लेनदेन UPI के माध्यम से किए जाते हैं और इसका उपयोग छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों तक व्यापक रूप से हो रहा है। यही वजह है कि MDR से जुड़ा कोई भी संभावित बदलाव करोड़ों व्यापारियों और डिजिटल भुगतान कंपनियों को प्रभावित कर सकता है। सरकार इस मामले में संतुलित नीति अपनाने की कोशिश कर रही है ताकि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा भी मिलता रहे और भुगतान व्यवस्था संचालित करने वाली संस्थाओं को वित्तीय स्थिरता भी मिल सके।

फिलहाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि UPI पर शुल्क लगाने का कोई तत्काल निर्णय नहीं लिया गया है। संशोधन विधेयक केवल भविष्य के लिए कानूनी ढांचा तैयार करता है। अंतिम निर्णय संसद में विधेयक पारित होने, नियम बनने और सरकार द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद ही लागू होगा। ऐसे में फिलहाल आम UPI उपयोगकर्ताओं को किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क देने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन आने वाले समय में डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर सरकार की नीति पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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