
2027 यूपी चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ी राजनीतिक सक्रियता
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। पश्चिमी यूपी के 14 जिलों की 71 विधानसभा सीटों पर सभी प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान तैयार करने में जुटे हैं। भारतीय जनता पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दे रही है, कांग्रेस किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर अभियान की तैयारी कर रही है, जबकि समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल अपने-अपने सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने में जुटे हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर दो दिवसीय दौरा शुरू किया है। मेरठ में उन्होंने पार्टी के शक्ति केंद्र संयोजकों के साथ बैठक की। इसके बाद सहारनपुर में भी संगठन के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं। पार्टी की ओर से बूथ, शक्ति केंद्र, मंडल और जिला स्तर पर संगठन की स्थिति की समीक्षा की जा रही है। इसके साथ ही युवाओं और नए मतदाताओं से जुड़े मुद्दों पर भी संवाद की योजना बनाई गई है।
बीजेपी की तैयारियों का एक बड़ा हिस्सा पश्चिमी यूपी में संगठनात्मक नेटवर्क को सक्रिय करने से जुड़ा है। पार्टी के अनुसार, क्षेत्र में करीब 5,000 शक्ति केंद्र संयोजकों के साथ संवाद किया जा रहा है। मेरठ और सहारनपुर के कार्यक्रमों के जरिए स्थानीय कार्यकर्ताओं से चुनावी तैयारियों और संगठन की जमीनी स्थिति के बारे में जानकारी ली जा रही है। पश्चिमी क्षेत्र में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल के 14 जिले शामिल हैं, जिनमें कुल 71 विधानसभा सीटें हैं।
वहीं कांग्रेस ने किसानों के मुद्दों को केंद्र में रखते हुए पश्चिमी यूपी में पहुंच बढ़ाने की तैयारी की है। पार्टी की ओर से किसान अधिकार यात्रा निकालने की योजना बताई गई है। इस अभियान के जरिए किसानों, खेत मजदूरों, ग्रामीण युवाओं, महिला किसानों और पशुपालकों से जुड़े मुद्दे उठाने की बात कही गई है। यात्रा का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों तक पार्टी की पहुंच बढ़ाना और किसानों से जुड़े स्थानीय सवालों को राजनीतिक विमर्श में सामने लाना बताया गया है।
समाजवादी पार्टी भी पश्चिमी यूपी में अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने के लिए नेताओं और विभिन्न समुदायों के प्रभावशाली लोगों से संपर्क बढ़ा रही है। हाल में अखिलेश यादव ने सहारनपुर का दौरा किया और गुर्जर समुदाय के प्रमुख नेताओं से मुलाकात की। सपा की रणनीति में अपने पारंपरिक सामाजिक आधार के साथ पश्चिमी यूपी के अन्य प्रभावशाली समुदायों तक पहुंच बनाने की कोशिश भी दिखाई दे रही है।
दूसरी ओर राष्ट्रीय लोक दल के प्रमुख जयंत चौधरी भी पश्चिमी यूपी में सक्रिय हैं। RLD अब बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA का हिस्सा है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट तथा किसान राजनीति से उसका पुराना जुड़ाव रहा है। जयंत चौधरी ने भी सहारनपुर का दौरा किया है। ऐसे में पश्चिमी यूपी में सपा और RLD की राजनीतिक गतिविधियां अलग-अलग दिशाओं में दिखाई दे रही हैं। दोनों दलों के बीच 2022 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन था, लेकिन बाद में राजनीतिक समीकरण बदल गए।
पश्चिमी यूपी की राजनीति में जाट, गुर्जर, मुस्लिम और किसान समुदायों के सामाजिक-राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसके अलावा गन्ना किसानों से जुड़े मुद्दे, फसल की कीमत, चीनी मिलों से भुगतान, बिजली, सिंचाई, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे सवाल भी चुनावी चर्चा का हिस्सा रहते हैं। राजनीतिक दल इन मुद्दों के जरिए अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि चुनाव में इन मुद्दों का वास्तविक प्रभाव किस रूप में सामने आएगा, यह आने वाले महीनों में होने वाले राजनीतिक अभियानों और उम्मीदवारों के चयन पर भी निर्भर करेगा।
पश्चिमी यूपी के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को समझने के लिए पिछले चुनावों के आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। संगठनात्मक आंकड़ों के अनुसार, 2022 के विधानसभा चुनाव में पश्चिमी क्षेत्र की 71 सीटों में बीजेपी ने 40 सीटें जीती थीं, जबकि सपा-रालोद गठबंधन को 31 सीटें मिली थीं। 2024 के लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र की 14 सीटों में बीजेपी और विपक्ष के बीच मुकाबला अधिक बंटा हुआ दिखाई दिया था। इन पुराने नतीजों के आधार पर 2027 के परिणामों का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा, लेकिन ये आंकड़े बताते हैं कि क्षेत्र में राजनीतिक मुकाबले और गठबंधन समीकरण समय के साथ बदलते रहे हैं।
इस बीच उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस ने 2027 विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ने की घोषणा की है, हालांकि सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच बातचीत की समयसीमा और सी



