
पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले तीसरी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले चुनावी तैयारियां तेज हो गई हैं और इसी क्रम में Election Commission of India (ECI) ने मतदाता सूची की तीसरी सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी कर दी है। यह लिस्ट विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है। हालांकि इस तीसरी सूची के जारी होते ही राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है, क्योंकि इसमें शामिल और हटाए गए नामों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
दरअसल, चुनाव आयोग लगातार चरणबद्ध तरीके से सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी कर रहा है। इससे पहले जारी की गई सूचियों में भी यह देखा गया था कि लाखों नामों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया उन लाखों मतदाताओं से जुड़ी है जिनके नाम “अंडर एडजुडिकेशन” यानी जांच के दायरे में थे। अब तीसरी सूची के जरिए इन मामलों को धीरे-धीरे अंतिम रूप दिया जा रहा है, लेकिन कितने नाम जोड़े गए और कितने हटाए गए—इस पर आयोग ने खुलकर जानकारी नहीं दी है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में इस बार करीब 60 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नामों की जांच की प्रक्रिया चल रही थी, जो चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी पुनरीक्षण प्रक्रियाओं में से एक मानी जा रही है। इस बीच पहले और दूसरे चरण में लाखों नए नाम जोड़े गए, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। राज्य की सत्ताधारी पार्टी All India Trinamool Congress (TMC) ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं और यह चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि यह प्रक्रिया वोटर लिस्ट को साफ और पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी है।
तकनीकी समस्याएं भी इस प्रक्रिया में बड़ी चुनौती बनकर सामने आई हैं। पहले चरण की सूची जारी होने के दौरान सर्वर में गड़बड़ी और डेटा एक्सेस की समस्या सामने आई थी, जिससे आम लोगों को अपना नाम जांचने में दिक्कत हुई। इसके अलावा, कई मामलों में लोगों ने शिकायत की कि उनके नाम बिना पर्याप्त कारण के हटा दिए गए, जिससे उनमें नाराजगी देखने को मिली।
पश्चिम बंगाल में 294 सीटों के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल 2026 को होना है, ऐसे में मतदाता सूची का अंतिम रूप लेना बेहद अहम माना जा रहा है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत की जा रही है, ताकि हर पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार मिल सके और गलत प्रविष्टियों को हटाया जा सके।
कुल मिलाकर, तीसरी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट के जारी होने से जहां एक ओर चुनावी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की दिशा में कदम बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर पारदर्शिता, तकनीकी खामियों और राजनीतिक आरोपों के चलते यह मुद्दा चुनावी बहस का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष और प्रभावी साबित होती है।



