
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की लगातार सामने आई घटनाओं के बाद केंद्र सरकार द्वारा लाया गया एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया है। राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद अब यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून पूरे देश में लागू होगा। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और सुरक्षित बनाना है, ताकि लाखों छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ न हो सके।
विधेयक पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात एक वीडियो संदेश जारी कर इसे देश के युवाओं और विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें मेहनत करने वाले छात्रों को न्याय मिले और पेपर लीक जैसे अपराधों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि नया कानून परीक्षा माफिया और संगठित गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा तथा इससे देश में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत होगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि सरकार युवाओं के भविष्य से कोई समझौता नहीं होने देगी।
हालांकि प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार की परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक मामलों को लेकर तीखी आलोचना की। उन्होंने सरकार पर युवाओं की चिंताओं को समय रहते गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया और कहा कि केवल कानून बना देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। उनकी टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिस पर पक्ष और विपक्ष के समर्थकों के बीच बहस शुरू हो गई।
सरकार का दावा है कि संशोधित कानून के तहत पेपर लीक, संगठित परीक्षा धोखाधड़ी, प्रश्नपत्रों की अवैध खरीद-फरोख्त और तकनीक के माध्यम से की जाने वाली अनियमितताओं पर पहले से अधिक कठोर कार्रवाई की जा सकेगी। इसके लिए सख्त दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं ताकि परीक्षा प्रक्रिया में शामिल किसी भी व्यक्ति या गिरोह को कानून से बचने का अवसर न मिले। सरकार का कहना है कि इससे भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा योग्य अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत होगा।
दूसरी ओर विपक्ष लगातार यह सवाल उठा रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में देश की कई प्रमुख परीक्षाओं के पेपर लीक होने के बावजूद समय पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। विपक्षी दलों का कहना है कि कानून के साथ-साथ परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय करना, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक है। राज्यसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने कई मुद्दे उठाए और विरोध स्वरूप वॉकआउट भी किया।
पिछले कुछ महीनों में देशभर में पेपर लीक के विरोध में छात्रों के बड़े आंदोलन देखने को मिले थे। इन प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार का भरोसा दिया था और इसी दिशा में संशोधित कानून लाया गया। अब इस कानून के संसद से पारित होने के बाद सभी की नजर इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर रहेगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कानून के साथ तकनीकी सुरक्षा, पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया और जवाबदेही की व्यवस्था भी मजबूत की जाती है, तो भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।



