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दिल्ली शराब नीति घोटाला में अरविंद केजरीवाल को बरी किए जाने से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ीं

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दिल्ली शराब नीति घोटाले से जुड़े विवाद में आज एक अहम मोड़ आया है, जब अरविंद केजरीवाल और उनके साथी को अदालत ने बरी कर दिया, जिससे कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों की राजनीति में नई मुश्किलें सामने आ सकती हैं। 2021-22 में लागू की गई दिल्ली आबकारी नीति को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे और इसके बाद जांच CBI द्वारा शुरू की गई थी। मामले ने राजनीतिक रूप से काफी हलचल मचाई और इसके चलते केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और पार्टी के अन्य नेताओं की मुश्किलें बढ़ी रहीं, लेकिन अब कोर्ट ने उन पर लगे आरोपों को पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण खारिज कर दिया।

बरी किए जाने के बाद कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा ने आम आदमी पार्टी को भारतीय जनता पार्टी का “सुविधाजनक सहयोगी” बताते हुए आरोप लगाया कि पंजाब और गुजरात जैसे आयोजनों को ध्यान में रखते हुए AAP को इसी तरह लाभ दिलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे कांग्रेस का चुनावी प्रभाव कमजोर हो सकता है और पार्टी को राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

AAP नेताओं ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे “सत्य की जीत” बताया और कहा कि अदालत ने साफ कर दिया कि किसी प्रकार की साजिश या भ्रष्टाचार सिद्ध नहीं हुआ है। केजरीवाल ने कोर्ट के फैसले को अपनी और पार्टी की ईमानदारी का प्रतीक बताया है और आरोप लगाया कि यह मामला केवल राजनीतिक उद्देश्य से बनाया गया था।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस फैसले के बाद दिल्ली सहित अन्य राज्यों की आगामी राजनीतिक लड़ाइयों में इसका असर देखा जा सकता है, क्योंकि अब AAP इस निर्णय को अपने पक्ष में प्रचारित करेगी, जबकि कांग्रेस को रणनीति समीक्षा करनी पड़ सकती है।

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