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चमोली टनल हादसे में 7 श्रमिकों की मौत

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उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की सुरंग में हुए भीषण हादसे ने बड़ा नुकसान पहुंचाया है। ताजा जानकारी के अनुसार, हादसे में 7 श्रमिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 3 श्रमिक अब भी लापता बताए जा रहे हैं। कई अन्य श्रमिकों को सुरंग से बाहर निकालकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। लापता लोगों की तलाश के लिए बचाव अभियान लगातार जारी है।

यह हादसा चमोली के पीपलकोटी क्षेत्र में निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजना की सुरंग में पानी और भारी मलबा अचानक घुसने के बाद हुआ। सुरंग के भीतर काम कर रहे श्रमिक इसकी चपेट में आ गए। देखते ही देखते सुरंग के एक हिस्से में पानी और मलबा भर गया, जिससे वहां मौजूद कई लोगों के बाहर निकलने का रास्ता बाधित हो गया।

हादसे के समय सुरंग में कुल 22 लोगों के मौजूद होने की जानकारी सामने आई है। बचाव दल ने कई श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला, जबकि मृतकों के शव भी बरामद किए गए। अलग-अलग चरणों में जारी रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद अब 3 श्रमिकों की तलाश पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

रेस्क्यू ऑपरेशन आसान नहीं है। सुरंग के अंदर लगातार पानी और मलबा जमा होने के कारण बचावकर्मियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल, पुलिस और अन्य एजेंसियां मौके पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। पानी के रिसाव और मलबे की स्थिति को देखते हुए लापता श्रमिकों तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

घायलों को बाहर निकालकर उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। शुरुआती जानकारी में घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग चरणों में अलग आंकड़े सामने आए, क्योंकि बचाव अभियान के दौरान लगातार लोगों को बाहर निकाला जाता रहा। अधिकारियों के अनुसार, रेस्क्यू ऑपरेशन और चिकित्सा सहायता दोनों पर एक साथ काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी हादसे की गंभीरता को देखते हुए स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और घटनास्थल पर पहुंचकर बचाव कार्य की समीक्षा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि बचाव एजेंसियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और सुरंग में फंसे या लापता लोगों तक पहुंचने की कोशिश जारी है।

यह हादसा उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में निर्माण कार्यों के दौरान मौजूद जोखिमों को भी सामने लाता है। भूस्खलन और भूगर्भीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में भारी बारिश के बीच सुरंगों और बड़े निर्माण कार्यों में सुरक्षा चुनौती और बढ़ जाती है। फिलहाल प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता 3 श्रमिकों का पता लगाना और घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है।

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