
कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित कार्यक्रम की रणनीति में बदलाव किया है। पहले इस कार्यक्रम को मॉक पार्लियामेंट या प्रतीकात्मक महाभियोग के रूप में आयोजित करने की योजना थी, लेकिन अब विपक्ष इसे ‘पब्लिक महाभियोग’ के तौर पर पेश करने की तैयारी कर रहा है। कार्यक्रम 30 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित किया जाना है। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर गंभीर सवाल हैं।
इस कार्यक्रम का स्थान भी बदलना पड़ा है। कांग्रेस के अनुसार, पहले अशोक होटल में आयोजन की योजना थी, लेकिन वहां अनुमति से जुड़ी समस्या सामने आई। इसके बाद रामलीला मैदान में कार्यक्रम आयोजित करने का विकल्प चुना गया, मगर वहां भी अनुमति नहीं मिलने का आरोप लगाया गया। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आधिकारिक आवास, 10 राजाजी मार्ग, पर कार्यक्रम करने का फैसला किया। कांग्रेस ने इन घटनाओं पर आपत्ति जताई है, जबकि अनुमति संबंधी विवाद के सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
29 अक्टूबर को खड़गे के आवास पर INDIA ब्लॉक के नेताओं की बैठक हुई, जिसमें कार्यक्रम की तैयारियों और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ विपक्षी दलों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। योजना के मुताबिक, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगी, खड़गे चर्चा की शुरुआत करेंगे और राहुल गांधी समापन वक्तव्य देंगे। कार्यक्रम में विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों के साथ नागरिक समाज के कुछ लोगों और SIR से प्रभावित होने का दावा करने वाले लोगों को भी अपनी बात रखने का मौका दिया जा सकता है।
कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का कहना है कि यह कार्यक्रम चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े सवालों को सार्वजनिक रूप से उठाने का माध्यम होगा। विपक्ष ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाते हुए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहा है। हालांकि, ये विपक्ष के राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें किसी न्यायिक या आधिकारिक जांच में सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। चुनाव आयोग की भूमिका और उसके फैसलों पर बहस के बीच यह कार्यक्रम केंद्र सरकार तथा विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक टकराव का हिस्सा बन गया है।
विपक्ष की योजना के अनुसार, 30 अक्टूबर का कार्यक्रम 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रैली से पहले आयोजित किया जा रहा है। इस रैली में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और कथित चुनावी अनियमितताओं के मुद्दे उठाए जाएंगे। राहुल गांधी ने भी लोगों से लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के मुद्दे पर रैली में शामिल होने की अपील की है। विपक्ष इस अभियान के जरिए चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताओं को व्यापक स्तर पर सामने लाना चाहता है।
इस मामले में ‘महाभियोग’ शब्द के इस्तेमाल को समझना भी जरूरी है। प्रस्तावित कार्यक्रम एक राजनीतिक और प्रतीकात्मक आयोजन है, न कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की औपचारिक कार्रवाई। भारत के संविधान में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान आधारों और शर्तों से जुड़ी है। इसलिए किसी राजनीतिक सभा में प्रस्ताव पारित करने या सार्वजनिक रूप से विरोध जताने भर से मुख्य चुनाव आयुक्त पद से नहीं हटते।
कुल मिलाकर, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित ‘पब्लिक महाभियोग’ कार्यक्रम विपक्ष के चुनावी पारदर्शिता अभियान का एक अहम हिस्सा है। कार्यक्रम के जरिए विपक्ष अपनी शिकायतों को सार्वजनिक मंच पर रखने और 1 नवंबर की रैली के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश करेगा। दूसरी ओर, इस आयोजन को लेकर स्थान और अनुमति का विवाद भी राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर 30 अक्टूबर को होने वाले कार्यक्रम और उसके बाद विपक्ष की आगे की रणनीति पर रहेगी।



