
Ford का बड़ा प्राइवेसी वादा, आपकी कार का डेटा आपकी मर्जी से होगा शेयर
आजकल आधुनिक कारें सिर्फ सफर का साधन नहीं रह गई हैं, बल्कि इंटरनेट और कई डिजिटल फीचर्स से लैस कनेक्टेड डिवाइस भी बन चुकी हैं। ऐसी कारें ड्राइविंग पैटर्न, लोकेशन, वाहन की स्थिति और इस्तेमाल किए जा रहे फीचर्स से जुड़ी जानकारी जुटा सकती हैं। इसी बीच अमेरिकी वाहन निर्माता कंपनी फोर्ड ने ग्राहकों की प्राइवेसी को लेकर अपनप्रतिबद्धता दोहराई है। कंपनी का कहना है कि वह ग्राहकों को यह समझने और नियंत्रित करने का विकल्प देती है कि उनकी कार से कौन-सा डेटा साझा किया जाए।
फोर्ड की प्राइवेसी पॉलिसी के मुताबिक, कंपनी कनेक्टेड कारों से वाहन की स्थिति, ड्राइविंग से जुड़ी जानकारी और लोकेशन जैसी कई तरह की सूचनाएं प्राप्त कर सकती है। इसमें कार का VIN यानी वाहन पहचान नंबर, सॉफ्टवेयर वर्जन, टायर प्रेशर, ईंधन का स्तर, इंजन का तापमान और वाहन की खराबियों से जुड़े डायग्नोस्टिक डेटा शामिल हो सकते हैं। कौन-सा डेटा जुटाया जाएगा, यह कार के मॉडल, उसमें मौजूद कनेक्टिविटी तकनीक और ग्राहक की चुनी गई सेटिंग्स पर निर्भर करता है।
कंपनी के मुताबिक, ड्राइविंग डेटा में कार की स्पीड, एक्सीलेरेटर और ब्रेक का इस्तेमाल, स्टीयरिंग, सीट बेल्ट और एयरबैग से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है। इसके अलावा, कनेक्टेड फीचर्स के लिए वाहन की सटीक लोकेशन भी इस्तेमाल की जा सकती है। कुछ कारों में वॉयस कमांड और कैमरों से मिलने वाली जानकारी भी संबंधित सेवाओं के संचालन और सुधार के लिए उपयोग की जा सकती है।
फोर्ड का कहना है कि इस डेटा का इस्तेमाल मुख्य रूप से कनेक्टेड सेवाएं उपलब्ध कराने, वाहन की सुरक्षा और गुणवत्ता बेहतर करने, तकनीकी खराबियों का पता लगाने और सॉफ्टवेयर अपडेट देने के लिए किया जाता है। कंपनी के अनुसार, वाहन से जुड़ी जानकारी के इस्तेमाल से संभावित समस्याओं की पहचान करने और सर्विस या रिकॉल से जुड़े कामों में भी मदद मिल सकती है।
ग्राहकों को डेटा शेयरिंग पर नियंत्रण देने के लिए फोर्ड इन-व्हीकल प्राइवेसी सेटिंग्स और दूसरे विकल्प उपलब्ध कराती है। वाहन के फीचर्स के हिसाब से ग्राहक कुछ प्रकार की जानकारी साझा करने से रोक सकते हैं। हालांकि, कंपनी यह भी स्पष्ट करती है कि यदि किसी कनेक्टेड सर्विस के संचालन के लिए कोई डेटा जरूरी है और ग्राहक उसे साझा करने से मना करते हैं, तो संबंधित सुविधा ठीक से काम नहीं कर सकती या उपलब्ध नहीं रहेगी।
कंपनी की प्राइवेसी प्रतिबद्धता में यह भी कहा गया है कि वह ग्राहकों की ड्राइविंग से जुड़ी जानकारी डेटा ब्रोकरों को नहीं बेचती। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वाहन से जुड़ा कोई भी डेटा कभी किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा नहीं किया जाता। कंपनी की पॉलिसी के अनुसार, ग्राहक की सहमति, उसके निर्देश, सेवाएं उपलब्ध कराने की जरूरत या कानूनी परिस्थितियों में कुछ जानकारी सहयोगी कंपनियों, सर्विस प्रोवाइडर, अधिकृत डीलर और अन्य संबंधित पक्षों के साथ साझा की जा सकती है।
अगर कोई ग्राहक अपनी फोर्ड कार बेचता है या किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर करता है, तो कंपनी मास्टर या फैक्ट्री रीसेट करने की सलाह देती है। इससे कार में सेव किए गए निजी डेटा, जैसे फोन कॉन्टैक्ट, पेयर किए गए मोबाइल डिवाइस और वाई-फाई नेटवर्क की जानकारी हटाई जा सकती है। साथ ही, कार का मोडेम फोर्ड अकाउंट से डिस्कनेक्ट हो सकता है। केवल मोबाइल से फोर्ड ऐप डिलीट कर देने से कार की डेटा शेयरिंग बंद नहीं होती।
हालांकि, फोर्ड की वेबसाइट पर दी गई विस्तृत कनेक्टेड-व्हीकल प्राइवेसी पॉलिसी मुख्य रूप से अमेरिका में खरीदी या लीज पर ली गई फोर्ड और लिंकन कारों पर लागू होती है। अलग-अलग देशों में डेटा सुरक्षा कानून, उपलब्ध फीचर्स और कंपनी की शर्तें अलग हो सकती हैं। इसलिए भारत में फोर्ड वाहन रखने वाले ग्राहकों को अपने मॉडल और संबंधित सेवाओं की स्थानीय प्राइवेसी शर्तें भी जांचनी चाहिए।
कनेक्टेड कारों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच वाहन कंपनियों के लिए ग्राहक डेटा की सुरक्षा और पारदर्शिता महत्वपूर्ण मुद्दे बन गए हैं। कार से मिलने वाली जानकारी सुरक्षा और सुविधा बढ़ाने में मदद कर सकती है, लेकिन ग्राहकों के लिए यह जानना भी जरूरी है कि कौन-सी जानकारी जुटाई जा रही है, उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से होगा और उसे साझा करने पर उनका कितना नियंत्रण है।


