
भारतीय नौसेना ने युद्धपोत INS ब्रह्मपुत्र में लगी आग और उसके पलटने की घटना के करीब दो साल बाद दो अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह हादसा जुलाई 2024 में मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में उस समय हुआ था, जब युद्धपोत मरम्मत के लिए वहां मौजूद था। इस घटना में एक नौसैनिक की जान चली गई थी और जहाज को भारी नुकसान पहुंचा था। अब इस मामले में जहाज के तत्कालीन कमांडिंग ऑफिसर और उस दिन ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को जिम्मेदारियों में कथित लापरवाही के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।
कोर्ट मार्शल का सामना करने वाले अधिकारियों में जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन और ऑफिसर ऑफ द डे लेफ्टिनेंट कमांडर शामिल हैं। सैन्य अदालत की कार्यवाही 12 अक्टूबर 2026 को मुंबई में शुरू हुई थी। कमांडिंग ऑफिसर पर नौसेना के जहाज को खतरे में डालने और ड्यूटी निभाने में लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। वहीं, दूसरे अधिकारी पर ड्यूटी में लापरवाही का आरोप है। हालांकि, अभी इन आरोपों पर कोई अंतिम फैसला नहीं आया है।
नौसेना की भाषा में किसी जहाज को खतरे में डालने को ‘हैजार्डिंग’ कहा जाता है। यदि कोर्ट मार्शल में अधिकारी दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें फटकार, वरिष्ठता में कमी या अधिकतम दो साल तक की कैद जैसी सजा हो सकती है। फिलहाल यह तय होना बाकी है कि हादसे के दौरान किन परिस्थितियों और कथित चूकों की वजह से युद्धपोत को इतना बड़ा नुकसान हुआ।
यह हादसा 21 जुलाई 2024 को हुआ था। उस समय INS ब्रह्मपुत्र मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में मरम्मत के दौर से गुजर रहा था। जहाज पर अचानक आग लग गई। आग बुझाने के लिए दमकलकर्मियों और बचाव दल ने बड़ी मात्रा में पानी का इस्तेमाल किया। इसी दौरान युद्धपोत का संतुलन बिगड़ गया और वह एक तरफ झुकते हुए पलट गया। जहाज पर मौजूद ज्यादातर कर्मी सुरक्षित बाहर निकल गए, जबकि कुछ को पानी में कूदकर अपनी जान बचानी पड़ी।
इस घटना में लीडिंग सीमैन सितेंद्र सिंह की जान चली गई थी। वह मरम्मत से जुड़े काम में शामिल थे और हादसे के दौरान लापता हो गए थे। नौसेना ने खोज अभियान चलाया और 24 जुलाई 2024 को उनका शव बरामद किया गया। इस हादसे ने युद्धपोतों की मरम्मत के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी और आग बुझाने की प्रक्रिया से जुड़े सवाल खड़े कर दिए थे।
हादसे के बाद INS ब्रह्मपुत्र को दोबारा सीधा करने में कई महीने लगे। जहाज की मरम्मत का काम पूरा हो चुका है और फिलहाल उसका परीक्षण चल रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, यह 2027 में समुद्र में चलने योग्य हो सकता है। हालांकि, समुद्र में चलने योग्य होने का मतलब यह नहीं है कि उसे तुरंत सक्रिय सैन्य सेवा में शामिल कर दिया जाएगा।
इस घटना के बाद नौसेना ने अपने जहाजों की सुरक्षा और संचालन प्रक्रियाओं की समीक्षा के लिए एक विशेष टास्क फोर्स भी बनाई थी। इस टास्क फोर्स ने सुरक्षा व्यवस्था और मानक संचालन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के लिए सुझाव दिए, जिन्हें नौसेना की विभिन्न कमान और इकाइयों तक पहुंचाया गया। नौसेना का कहना है कि हादसे की वजह का पता लगाना, जिम्मेदारी तय करना और सुरक्षा उपाय मजबूत करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।



